वादे पूरे करने हैं तो सेना से पंगा लेगा पड़ेगा इमरान खान को!

इमरान खान | Imran Khan

इन्फोपत्रिका, नई दिल्ली.
25 जुलाई 2018 को पाकिस्तान में आम चुनाव हुए. इन चुनावों में पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल कीं. 20 साल से भी ज्यादा वक्त तक राजनीति की दौड़ लगाने के बाद इमरान खान आखिरकार पाकिस्तान के सबसे बड़े ओहदे पर बैठने को अब पूरी तरह तैयार हैं. 26 तारीख को जब चुनाव नतीजे आ ही रहे थे, तब इमरान खान ने अपने देश के नाम एक बहुत ही क्रांतिकारी भाषण दिया.

इमरान खान का भाषण बहुत हद तक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के भाषणों को मिला जुला स्वरूप प्रतीत हुआ. हालांकि इमरान के इस भाषण को नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के भाषणों की कॉपी कहना गलत होगा, क्योंकि जो भी लोग गरीबों के हक की बात करेंगे तो वो बातें एक जैसी ही होंगी. आज हम इमरान खान के भाषण के एक सबसे अहम बिंदु को समझने की कोशिश करेंगे और यह भी समझने का प्रयास करेंगे कि उनके दावों में कितना दम है और उनके इरादे उन्हें कहां तक पहुंचाने में सक्षम होंगे.

कैसे लाएंगे विदेशी निवेश

समझा जा रहा है कि पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम है. यदि उसे सरवाइव करना है तो सबसे जरूरी विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना होगा. इमरान खान ने अपने भाषण में कहा कि वह विदेशी निवेश लाएंगे और देश में बेरोजगारी खत्म करने की तरफ बड़े-बड़े कदम उठाएंगे. सुनने में बेशक यह बात बहुत अच्छी लगती है मगर यह काम करना इतना आसान नहीं, जितना कि कहना.

आतंकवाद का जिक्र क्यों नहीं

इमरान खान ने अपने पूरे भाषण में कहीं भी आतंकवाद अथवा दहशतगर्दी का कोई जिक्र नहीं किया. आतंकवाद और विदेशी निवेश एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं. यदि आतंकवाद का उत्पादन जारी रहा तो कोई भी विदेशी निवेशक पाकिस्तान में निवेश पहले हजार बार सोचेगा और हजार बार सोचने के बाद यह फैसला लेगा कि अच्छा होगा.. यदि पैसा कहीं और लगाया जाए. आखिर कौन बिजनेसमैन अपना पैसा ऐसी जगह लगाना चाहेगा, जहां से रिटर्न की उम्मीद या तो बेहद कम हो या फिर बिल्कुल भी ना हो?

कैसे लाएंगे विदेशी निवेश

आतंकवाद को खत्म करना पाकिस्तान के नेताओं के हाथ में तो कतई नहीं है, क्योंकि इस पर सेना का नियंत्रण है. पाकिस्तानी सेना ने खुद आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और अपने हिसाब से भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया है. इसी का नतीजा है कि पाकिस्तान खुद भी आतंकवाद से परेशान है. सांप तो आखिर सांप है, उसे मौका मिलेगा तो अपने मालिक को भी डस लेगा.

क्या हालात से समझौता कर लेंगे इमरान

पाकिस्तानी सेना कभी नहीं चाहेगी कि देश से आतंकी संगठनों का खात्मा हो जाए. ऐसे में आतंकवाद को खत्म करना और विदेशी निवेशकों को यह भरोसा दिलाना कि उनका पैसा और निवेश पूरी तरह सुरक्षित है, इमरान खान के लिए सबसे मुश्किल काम होगा. या तो इमरान खान सेना से टकराएंगे और विदेशों से निवेश लाने में सफल हो जाएंगे, या फिर वर्तमान हालातों के साथ समझौता कर लेंगे?

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