कर्नाटक चुनाव : मोदी के आते ही बदली चुनावी हवा

PM Modi in karnataka election

रूली बिश्‍नोई/ इन्‍फोपत्रिका


एक मई से पहले कर्नाटक में कांग्रेस का हर छोटा-बड़ा नेता पार्टी की जीत को लेकर आश्‍वस्‍त था, लेकिन छह मई आते-आते कांग्रेस खेमे में बेफिक्री की जगह परेशानी ने ले ली है। कर्नाटक की चुनावी हवा के रुख में आए बदलाव का कारण है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धुआंधार प्रचार। एक मई को मोदी ने कर्नाटक में भाजपा के चुनावी प्रचार की कमान संभाली थी। पांच दिनों में ही उन्‍होंने कांग्रेस की बनाई बढत को पार कर लिया है । राज्य के चुनावी माहौल में हुए इस ताजा बदलाव से कांग्रेस भी वाकिफ है। लेकिन, कांग्रेस इस बदलाव को स्वीकार करने के लिए अभी तैयार नहीं है। कांग्रेस अब भी दावा कर रही है कि कर्नाटक में बीजेपी को मोदी भी बचा नहीं पाएंगे।


PM Modi in karnataka election
प्रचार के आखिरी चरण में जहां कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान में ठहराव सा आ गया है वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में भाजपा के प्रचार अभियान को नई गति मिली है। कर्नाटक में भाजपा गुजरात वाली गलती नहीं दोहराना चाहती। पार्टी नहीं चाहती कि गुजरात की तरह कर्नाटक में भी भाजपा समर्थक कोई वोटर वोट डाले बिना रह जाए। इसीलिए पार्टी के सीएम कैंडिडेट येदियुरप्‍पा ने प्रत्‍येक वोटर को घर से निकालकर बूथ तक लाने की बात कही। भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने भी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपनी पूरी ऊर्जा लगाने की बात कई बार दोहराई है।

शुरूआत में प्रचार से ज्‍यादा जोर बूथ प्रबंधन पर

चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के बाद मार्च और अप्रैल में बीजेपी का प्रचार अभियान सुस्त था। बीजेपी के सीएम कैंडिडेट बीएस येदियुरप्पा ने पहले प्रचार अभियान की कमान संभाल रखी थी। लेकिन, उनकी जनसभाओं में बहुत ज्‍यादा भीड़ नहीं आ रही थी। कांग्रेस इससे खुश नजर आ रही थी। लेकिन भाजपा इससे परेशान नहीं थी क्‍योंकि भाजपा के चुनावी प्रबंधकों ने पहले से ही तय कर रखा था कि प्रचार के शुरूआत में उसे कांग्रेस से आगे नहीं दिखना है। पूरा जोर प्रचार के आखिरी दस दिनों में ही लगाना है जिससे मतदान का दिन आते-आते भाजपा की हवा बन जाए और पार्टी हवा का रुख देखकर अंतिम समय पर अपने मत का निर्णय करने वाले वोटरों को अपनी और कर सके। शुरूआत में भाजपा का जोर बूथ स्‍तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करना और अपने परंपरागत वोटर को अपने साथ जोड़े रखना था।


PM Modi in karnataka election
कांग्रेस के कई नेता इस बात से खुश भी थे और हैरान भी। पार्टी के कुछ नेता तो इस दावे के साथ जश्न भी मना रहे थे कि शायद भाजपा को भी इस बात का अहसास हो गया है कि कर्नाटक में बीजेपी के जीतने का कोई चांस नहीं है, इसलिए भाजपा चुनाव प्रचार अभियान को गति देने के लिए पूरा जोर नहीं लगा रही है। यहीं पर कांग्रेस के चुनावी प्रबंधक भूल कर बैठे। वे भाजपा की रणनीति को समझने में असफल रहे। इसलिए अब चुनाव प्रचार के चरम सीमा पर आकर पार्टी भाजपा से पिछड़ती नजर आ रही है।


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मोदी की रैलियों में भारी भीड़

चुनाव के ठीक 12 दिन पहले यानी 1 मई को पीएम मोदी ने कर्नाटक में प्रचार अभियान का आगाज़ किया। अब वो बीजेपी के प्रचार अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं. राज्य में मोदी की रोज़ाना औसतन 3 रैलियां हो रही हैं, जिनमें वो कांग्रेस पर एक के बाद एक जुबानी हमले कर रहे हैं। मोदी बीजेपी के लिए 21 रैलियां करेंगे। बीजेपी नेताओं का दावा किया है कि जिस तरह से मोदी ने चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभाली हुई है, उससे राज्य में बीजेपी की सरकार बननी तय है। एक अंग्रेजी समाचार चैनल को दिए इंटरव्‍यू में भी बीजेपी के सीएम कैंडिडेट बीएस येदियुरप्पा ने भी माना की पहले कांग्रेस बीजेपी से आगे नजर आ रही थी। लेकिन अब मोदी के आने के बाद चीजें एकदम से बदल गईं। उनकी रैलियों में जुट रही भीड़ से जीत के संकेत मिल रहे हैं।

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