बोलनी है अंग्रेजी तो थोड़ी-थोड़ी पी लिया करो यारो

benefit of alcohol

इन्‍फोपत्रिका डेस्‍क


दो घूंट शराब गले के नीचे उतरते ही आदमी को शेर बना देती है। ये बात तो आपने खूब सुनी होगी। लेकिन शायद आपने यह नहीं सुना होगा कि शराब किसी को किसी ऐसी भाषा बोलने में भी उस्‍ताद बना सकती है, जो उसकी मातृभाषा नहीं है। तो अब सुन लीजिए। और बड़े गौर से सुनिए क्‍योंकि ये बात है भी गौर करने वाली। शराब की इस अनोखी खूबी के बारे में बताया है यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल, ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज और नीदरलैंड्स के यूनिवर्सिटी ऑफ़ मास्ट्रिच के शोधकर्ताओं ने। शोधकर्ताओं का कहना है कि किसी दूसरी भाषा को अगर शराब पीकर बोलने की कोशिश की जाए तो परिणाम काफी बेहतर आते हैं।

थोड़ी सी जो पी ली

साइंस मैगज़ीन ‘जर्नल ऑफ़ साइकोफ़ार्माकोलॉजी’ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक थोड़ी सी शराब किसी दूसरी भाषा में बोलने में मदद करती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर आप किसी दूसरी भाषा में बोलने की कोशिश करते हैं तो कई बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा। सही शब्द आपको मुश्किल से मिलेंगे और उनका ठीक से उच्चारण करना भी चुनौती जैसा लगेगा। लेकिन अगर आप थोड़ी सी शराब पी लें तो उस दूसरी भाषा के शब्द अपने आप मुंह से धारा प्रवाह निकलेंगे। लफ्जों की तलाश खत्म हो जाएगी और आपकी बातें लच्छेदार लगने लगेंगी। मानो ये जुबान आपकी अपनी हो।

ऐसे करती है शराब मदद

ये भी सही है कि शराब हमारी याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर असर डालती है और इस लिहाज से ये एक बाधा है। लेकिन दूसरी तरफ ये हमारी हिचकिचाहट भी दूर करती है, हमारा आत्म-विश्वास बढ़ाती है और सामाजिक व्यवहार में संकोच कम करती है। जब सामान्‍य परिस्थितियों में कोई व्‍यक्ति दूसरी भाषा बोलने का प्रयास करता है तो वह काफी सोचता है। गलती होने का डर उसमें संकोच पैदा करता है। इसलिए वह चाहकर भी ढंग से बात नहीं कर सकता। वहीं जब उस पर अल्‍कोहल का असर होता है तो उसका आत्‍मविश्‍वास बढ़ जाता है। शराब का सुरूर उसे कुछ नया कर दिखाने को उत्‍साहित करता है। यही उत्‍साह उसके संकोच पर भारी पड़ता है और वो प्रभावी तरीके से उस भाषा में भी बात कर लेता है, जो उसके लिए नई भी है और कठिन भी।


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Image : Google

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ऐसे हुआ शोध

यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल, ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज और नीदरलैंड्स के यूनिवर्सिटी ऑफ़ मास्ट्रिच के शोधकर्ताओं ने इस विचार को टेस्ट किया. टेस्ट के लिए 50 जर्मन लोगों के एक समूह को चुना गया जिन्होंने हाल ही में डच भाषा सीखी थी। कुछ लोगों को पीने के लिए ड्रिंक दिया गया जिनमें थोड़ा एल्कोहल था। लोगों के वजन के अनुपात में एल्कोहल की मात्रा दी गई थी। कुछ के ड्रिंक्स में एल्कोहल नहीं था। टेस्ट में भाग लेने वाले जर्मन लोगों को नीदरलैंड्स के लोगों से डच में बात करने के लिए कहा गया!


डच भाषियों को ये पता नहीं था कि किसने शराब पी रखी है और किसने नहीं। जांच में ये बात सामने आई कि जिन्होंने शराब पी रखी थी वे बेहतर उच्चारण के साथ बात कर रहे थे। शोधकर्ताओं ने ये साफ किया कि उन्हें ये नतीजे शराब की बहुत कम मात्रा में खुराक देने से मिले हैं।

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