निपाह का कोई डर नहीं, यहां होती है चमगादड़ों की पूजा!

Nipah, Bats

इन्फोपत्रिका, डेस्क.
निपाह वायरस का नाम सुनते ही आंखों के सामने जो एक तस्वीर बनती है, उसमें सूअर और चमगादड़ भी उभरकर आते हैं. इसलिए, क्योंकि इन दो जानवरों को जानलेवा वायरस निपाह का वाहक माना जा रहा है. यदि किसी फल को चमगादड़ ने चखा है तो उसमें निपाह वायरस हो सकता है और यदि उसी फल को इंसान खा ले तो वह मौत की चौखट तक पहुंच सकता है.

इस सबके बीच एक जानने लायक खबर ये भी है कि भारत में एक जगह ऐसी है जहां चमगादड़ों की पूजा होती है और लोग इन्हें समृद्धि का प्रतीक मानते हैं. ये जगह है बिहार के जिला वैशाली में. यहां के राजापाकर ब्लॉक के गांव सरसई (रामपुर रत्नाकर) में एक मंदिर है, जो केवल इसलिए प्रसिद्ध है कि यहां चमगादड़ बसते हैं और लोग इनमें श्रद्धा व्यक्त करते हैं.

इस गांव में हर रोज कई पर्यटक केवल चमगादड़ों को देखने पहुंचते हैं. गांव के लोगों का मानना है कि चमगादड़ उनके गांव की रक्षा करते हैं. गांव वाले इन्हें लक्ष्मी के समान मानते हैं.

Nipah, Bats

सालों से गांव में है चमगादड़ों का बसेरा

गांव के लोगों से बात करें तो चमगादड़ों का बसेरा कई सालों से है. बुजुर्गों का कहना है कि जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से चमगादड़ों का ये नजारा देख रहे हैं. एक दंतकथा है कि मध्यकाल में वैशाली जिले में एक महामारी फैली थी. इस दौरान कहीं से आकर ये चमगादड़ यहां इकट्ठा हुए और महामारी खत्म होती गई. इसके बाद ये चमगादड़ यहीं बस गए.

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस तालाब के किनारे पीपल और अन्य पेड़ों पर इन चमगादड़ों का बसेरा है, उस तालाब का निर्माण वर्ष 1402 में राजा शिव सिंह ने कराया था. तालाब और पेड़-पौधों की हरियाली से सराबोर यह एरिया 50 एकड़ में फैला है.


यहां के ग्रामीण इस बात से खफा हैं कि चमगादड़ों को देखने के लिए यहां सैकड़ों पर्यटक प्रतिदिन आते हैं लेकिन सरकार ने उनकी सुविधा के लिए कोई कदम नहीं उठाया है. सरसई गांव के बुजुर्ग कमेश्वर यादव का दावा है कि यह भ्रम है कि चमगादड़ अशुभ हैं. उनका दावा है कि चमगादड़ का जहां वास होता है वहां कभी धन की कमी नहीं होती.

चमगादड़ करते हैं रखवाली

सरसई गांव के लोगों का कहना है कि चमगादड़ उनके गांव की रखवाली करते हैं. गांव में लोग घरों में ताले नहीं लगाते, फिर भी किसी के घर में चोरी नहीं होती. गांववाले इसे चमगादड़ों का ही चमत्‍कार बताते हैं. एक खास बात और है. रात गांव के तालाब, जिसके पास ये चमगादड़ रहते हैं, उस जगह अगर कोई बाहरी व्‍यक्ति चला जाए तो ये चमगादड़ शोर मचा देते हैं. वहीं गांव के व्‍यक्ति के जाने पर चमगादड़ कोई हरकत नहीं करते.

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