अरंडी के भावों में तेजी के पीछे क्‍या है राजॽ

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इन्‍फोपत्रिका बिजनेस डेस्‍क


अरंडी यानि कैस्‍टर की तेजी सभी को हैरान कर रही है। निर्यात मांग कमजोर है। बाजार में स्‍टॉक भी पूरा पड़ा है। फिर भी इसके दाम हाजिर और वायदा बाजार में बढ रहे हैं। जानकारों को इस बढोतरी में गड़बड़ी नजर आ रही है। उनको लगता है कि ये सारा खेल सट्टोरियों का है। सट्टोरियों पर लगाम लगाने के लिए एनसीडीईएक्स विशेष नकद मार्जिन शुल्क भी लगा चुका है। लेकिन इसका असर भी होता दिखाई नहीं दे रहा।

मार्च में 30 फीसदी बढे दाम

अरंडी की कीमतें 5,000 के आस-पास बनी हुई हैं। कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स पर कारोबार के दौरान करीब सभी अनुबंधों में करीब दो फीसदी की तेजी देखने को मिली। हाजिर बाजार में अरंडी 5,000 रुपये प्रति क्विंटल की ओर अग्रसर है। इस साल अरंडी तेल का निर्यात पिछले साल की अपेक्षा करीब नौ फीसदी कम हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 के शुरुआती नौ महीनों में 4,43,763 टन अरंडी तेल का निर्यात हुआ, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 के शुरुआती 9 महीनों में 4,86,236 टन निर्यात हुआ था। वित्त वर्ष 2015-16 में कुल निर्यात 5,43,274 टन हुआ है जो इस साल हो मुश्किल है।


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ये है दाम बढने के कारण

अरंडी की कीमतों में तेजी की वजह कम उत्पादन और निर्यात मांग बढऩे की उम्मीद को माना जा रहा है। इस साल देश में करीब 25 फीसदी उत्पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन उत्पादन और मौजूदा स्टॉक और मांग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यह वजह भी सटीक नहीं लग रही है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अरंडी का उत्पादन 10.67 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 14.23 लाख टन अरंडी का उत्पादन हुआ था। पिछले साल का करीब 5.03 लाख टन स्टॉक बचा हुआ है। इसमें इस साल का उत्पादन जोड़ दें तो देश में अरंडी का कुल स्टॉक 15.70 लाख टन के करीब है। जबकि साल भर में उद्योग की मांग करीब 14.25 लाख टन की रहती है। इसलिए ऐसा नजर नहीं आता की मांग और आपूर्ति में कोई गहरी खाई अब है या भविष्‍य में आ जाएगी।

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