यह योजना सिरे चढी तो किसान भी विदेश भेज सकेंगे अपने उत्‍पाद

Special agricultural export zone

इन्‍फोपत्रिका, खेती डेस्‍क
वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार जी जान से जुटी है। किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्‍य दिलाने के लिए सरकार का जोर अब कृषि उत्‍पादों के निर्यात (Export of Agri commodity) को बढाने पर है। इसके लिए सरकार अब विशेष कृषि निर्यात जोन (Special agricultural export zone) बनाएगी। सरकार जल्‍द ही राष्ट्रीय कृषि निर्यात नीति की घोषणा करेगी। इस नीति का मसौदा तैयार हो चुका है।


Special agricultural export zone

क्‍या है विशेष कृषि निर्यात जोन

विशेष कृषि निर्यात जोन ऐसे क्षेत्र होंगे जहां से कृषि उत्‍पादों का निर्यात (Export of Agri commodity) करने के लिए विशेष आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। देश में अलग-अलग जगह बने इन जोन (Special agricultural export zone) को बंदरगाहों और हवाई अड्डों से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा सरकार इनमें ऐसी व्‍यवस्‍था भी करेगी जिससे एक आम किसान भी समूह बनाकर अपने उत्‍पादों का निर्यात अपने स्‍तर पर कर सके।

कृषि उत्पादों का निर्यात (Export of Agri commodity) बढाने पर जोर

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत में सालाना 60 करोड़ टन कृषि और बागवानी उत्पादों की पैदावार होती है। प्रस्तावित राष्ट्रीय कृषि निर्यात नीति में किसानों की आमदनी को दोगुना करने के उपायों को शामिल किया जाएगा। कृषि उत्पादों का मौजूदा निर्यात 22 हजार करो़ड़ रुपये है, जिसे बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये पर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


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जैविक कृषि उत्पादों पर जोर

वैश्विक बाजार में भारत की कृषि निर्यात हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए जैविक कृषि उत्पादों की पैदावार में बढ़ोतरी पर जोर होगा। राष्ट्रीय कृषि निर्यात नीति के मसौदे में इसे शामिल करते हुए कृषि में जैविक उत्पादों को विशेष प्रोत्साहन ‌दिया जाएगा। भारत को जैविक कृषि उत्पादों का केंद्र बनाने की योजना है, जिसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कृषि उत्पादों की क्षति को रोकना मकसद

राष्ट्रीय कृषि निर्यात नीति का मसौदा कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और वाणिज्य मंत्रालय संयुक्त रुप से तैयार कर रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के सहयोग से कृषि उत्पादों की क्षति को रोका जा सकता है। एक आंकड़े के मुताबिक कृषि उपज का 30 फीसदी हिस्सा प्रसंस्करण के अभाव में सड़ अथवा नष्ट हो जाता है। आने वाली नई निर्यात नीति से उसका संरक्षण किया जा सकता है।

खाड़ी देशों पर नजर

भारत संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे खाड़ी देशों से संपर्क में है, जहां कृषि उत्पादों की बहुत मांग है। चावल निर्यात के लिए चीन से बातचीत जारी है। भारत लंबे समय बाद सरसों की खेप चीन को भेज रहा है। वर्ष 2017-18 में देश में 17 लाख टन जैविक कृषि उत्पादों की उपज हुई थी, जिसमें तिलहन, मोटे अनाज, कपास, दालें, जड़ी-बूटी, चाय, फल और मसाले प्रमुख थे। इस समय देश में जैविक खेती करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है, जिसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और राजस्थान का नाम है। जैविक उत्‍पादों के साथ ही अन्‍य कृषि उत्‍पादों के निर्यात के निर्यात में भी इजाफा करने को सरकार प्रयासरत है। इसलिए सरकार विशेष कृषि निर्यात जोन (Special agricultural export zone) बनाएगी।

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