कपास के भाव में गिरावट के आसार कम

Cotton Rate

इन्‍फोपत्रिका, खेती डेस्‍क
कपास के उत्पादन, स्टॉक एवं खपत के जो समीकरण बन रहे हैं उससे आगामी महीनों के दौरान कपास (Cotton Rate) के घरेलू बाजार भाव में मंदी की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। कपास बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि 2018-19 में कैरी ऑवर स्‍टॉक सीजन 2017-18 के मुकाबले कम है, उत्‍पादन भी कम होगा और आयात में भी कमी के आसार हैं। कुल खपत पिछले साल जैसी ही रहेगी। इन कारणों से सीजन के अंत में अधिशेष स्‍टाक नगण्‍य हो जाएगा। यही सब बातें कपास की कीमतों (Cotton Rate) को सहारा देगी।

पिछले सीजन की बैलेंस सीट

2017-18 सीजन के आरंभ में करीब 36 लाख गांठ कपास का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था। 365 लाख गांठ (170 किलो) का उत्‍पादन हुआ। 15 लाख गांठ आयात की गई। इस तरह घरेलू बाजार में कुल उपलब्‍धता 416 लाख गांठ हो गई। इस कुल उपलब्ध मात्रा में से भारत में 324 लाख गांठ रुई की खपत टेक्सटाइल मिलों, छोटी कॉटन इकाइयों तथा गैर मिलों में हुई। 69 लाख गांठ निर्यात किया गया। इस तरह 2018-19 के चालू मार्केटिंग सीजन की शुरुआत पर करीब 23 लाख गांठ का कैरी आवर स्‍टाक बचा।


Cotton Rate
Image : Google

सीजन 2018-19 की तस्‍वीर

सीजन के शुरूआत में करीब 23 लाख गांठ कपास का कैरी ऑवर स्‍टाक उपलब्‍ध था। बहुत से बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल कपास उत्‍पादन 350 लाख गांठ के आसपास हो सकता है। यह पिछले साल से 15 लाख कम है। कपास आयात में भी इस बार कमी आने का अनुमान अमेरिकी कृषि विभाग ने जताया है। यूएसडीए ने 19 लाख गांठ के आयात का अनुमान जताया है जबकि कुछ घरेलू बाजार जानकार आयात 15 लाख गांठ का का ही मान रहे हैं। घरेलू प्रभाग में सीजन 2018-19 में 324 लाख गांठ (गत सीजन के बराबर) रुई की खपत का अनुमान है। इसी तरह चीन की अच्‍छी मांग की वजह से कपास का निर्यात 69 लाख गांठ के पिछले वर्ष के स्तर पर ही आंका जा रहा है।


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तेजी के आसार, Cotton rate may go upward

सीजन की शुरूआत से ही इस बार पिछले सीजन के मुकाबले कॉटन के रेट (Cotton Rate) तेज हैं। उत्‍पादन, मांग-आपूर्ति और अंतरराष्‍ट्रीय बाजार की जो स्थितियां बन रही है उससे लग रहा है आगे सीजन में कपास के रेट (Cotton Rate) में मंदी के आसार कम और तेजी के ज्‍यादा हैं। भाव ठीक मिलने पर किसान इस बार कपास का स्‍टाक कम कर रहे हैं। यही कारण है कि हरियाणा, पंजाब और राजस्‍थान में मंडियों में माल की आवक अच्‍छी हो रही है।

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