कार्डिअक अरेस्ट : आखिर ये है क्या बला? कैसे बचा जाए इससे?

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इन्फोपत्रिका, हेल्थ डेस्क.
इन दिनों अक्सर सुनने में आता है कि लोग कार्डिअक अरेस्ट से मर रहे हैं. बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्हें इस टर्म का मतलब ही नहीं पता. कुछ लोग इसे दिल का दौरा मानते हैं. हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत हुई. पहले इसकी वजह दिल का दौरा बताया गया तो बाद में पता चला कि असल वजह कार्डिअक अरेस्ट था. आखिर ये है क्या? ये क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

हार्ट अटैक Vs कार्डिअक अरेस्ट

सबसे पहले तो हम ये बता दें कि हृदयघात (दिल का दौरा) और कार्डिअक अरेस्ट दोनों अलग-अलग चीजें हैं. कार्डिअक अरेस्ट एक तरह की मेडिकल इमरजेंसी है. इसमें दिल का धड़कना अचानक से रुक जाता है, मगर यहां धड़कन रुकने की वजह हृदयघात (हार्ट अटैक) से अलग होती है. हृदयघात में ब्लॉक्ड आर्टरीज़ (रक्त नाड़ियों में रुकावट) के कारण दिल को रक्त नहीं मिल पाता है, जबकि कार्डिअक अरेस्ट में इलेक्ट्रिक इनबैलेंस की वजह से दिल धड़कना बंद कर देता है.

कई बार हार्ट अटैक के तुरंत बाद या फिर रिकवरी के बाद कार्डिअक अरेस्ट हो सकता है. कार्डिअक अरेस्ट के मरीज के यदि समय रहते प्राथमिक उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है. तो अब हम आपको बताते हैं कार्डिअक अरेस्ट के लक्षण क्या होते हैं?

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कार्डिअक अरेस्ट के लक्षण

अगर किसी ठीकठाक व्यक्ति का ब्लड प्रेशर अचानक कम आए.
शरीर पीला पड़ने लगे और वह लड़खड़ाकर जमीन पर गिर जाए.
उसकी धड़कन अनियमित हो जाए और पल्स बंद हो जाए.
कभी-कभी सांस फूलना, उल्टी या सीने में दर्द (चेस्ट पेन) भी इसके लक्षणों में शामिल है.

उपरोक्त लक्षणों के आधार पर आप जान सकेंगे कि ये कार्डिअक अरेस्ट है. इसके बाद बारी आती है पीड़ित व्यक्ति की जान बचाने की.

CPR देने से बच सकती है जान

इस स्थिति में पहले 10 मिनट बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. और डॉक्टर कहते हैं कि हर मिनट बीतने के साथ-साथ मरीज के बचने की संभावनाएं कम होती जाती हैं. इसलिए जरूरी है कि उसे समय पर बचाया जाए.

यदि आपके समक्ष किसी व्यक्ति को कार्डिअक अरेस्ट हो जाए तो आप उसे सीपीआर (Cardio-Pulmonary Resuscitation) दें. सीपीआर देने से व्यक्ति के बचने के चांस काफी बढ़ जाते हैं. सीपीआर क्या है और कैसे दिया जाता है इस बारे में नीचे दिए बिंदुओं पर गौर करें-

1. कार्डिअक अरेस्ट के मरीज को जमीन पर हवादार जगह पर लिटाएं.
2. उसकी नाक और गले की जांच करें और देखें कि उसमें मुंह में ऐसा कुछ भी न हो, जो श्वास में बाधक बन सकता हो.
3. मरीज के कपड़े ढीले कर दें.
4. अगर वह पहले से ही दिल का रोगी है और कोई दवा लेता है तो उसे दवा दें.
5. मरीज की छाती अपने दोनों हाथों की हथेली से दबाएं. इसे पंपिंग कहा जाता है. कोशिश करें कि एक मिनट में 80-100 पंपिंग जरूर करें.
6. मरीज यदि बच्चा है तो उसके मुंह से अपना मुंह सटाकर उसे कृत्रिम सांस दें. ये सबसे महत्वपूर्ण है. उसे मुंह से सांस देते हुए उसकी नाक को दबा दें, ताकि कृत्रिम सांस उसके फेफड़ों तक पहुंच जाए. बड़े मरीजों के लिए मुंह से सांस देने की सलाह नहीं दी जाती.
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7. यदि आपने सफलतापूर्वक सीपीआर प्रक्रिया पूरी कर दी है तो मरीज को तुरंत डॉक्टर तक पहुंचाएं.

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