बाजार में लौटे ग्राहक, बासमती की सभी किस्‍मों में आई तेजी

Basmati dhan ke bhav

इन्‍फोपत्रिका बिजनेस डेस्‍क


पिछले सप्‍ताह बासमती के बाजार में जो एकदम से मंदी आई थी, वो अब धीरे-धीरे दूर होने लगी है। 3200 रुपए से 2500 तक पहुंच चुका बासमती 1509 ने अब फिर गति पकड़ी है। हरियाणा में यह अब 2850 रुपए तक बिकने लगा है। वहीं बासमती 1121 और डीपी की आवक भी हरियाणा और पंजाब में बढ़ रही है। बासमती बाजार के जानकारों का कहना है कि बासमती में फिलहाल मंदी की संभावना नहीं है। पिछले सप्‍ताह जिन ग्राहकों ने बाजार से मुंह मोड़ा था, वो अब फिर बाजार लौट आए हैं।

www.infopatrika.com ने बताया था कि मंदी है चार दिन की मेहमान

www.infopatrika.com ने 13 अक्‍टूबर को ही बताया था कि बासमती 1509 में आई मंदी लंबी अवधि तक नहीं रहेगी। अगले सप्‍ताह इसमें तेजी आ सकती है। बासमती के घरेलू और अंतरराष्‍ट्रीय बाजार के विशेषज्ञ अमृतसर के नीरज शर्मा ने इन्‍फोपत्रिका से बातचीत में बताया था कि 1509 में आई गिरावट को हमें बाजार के करेक्‍शन की तरह लेना चाहिए। 2600 रुपए 1509 का बेस प्राइस है। बाजार की अगर हम गहराई से पड़ताल करने से पता चलता है कि 1509 में अब आगे भारी गिरावट की कोई गुंजाइश नहीं है।


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Image : infopatrika.com

नीरज ने ने बताया था कि अगले सप्‍ताह से 1509 में तेजी का झोंका आ सकता है। हुआ भी ठीक वैसा ही। इस सप्‍ताह से 1509 में तेजी आ गई। नीरज का कहना है कि 1509 में 3200 रुपए होने से स्‍टॉकिस्‍ट इससे दूर हो गए क्‍योंकि इस भाव पर स्‍टाक करना उन्‍हें फायदे का सौदा नजर नहीं आया। भाव तेज होते इन्‍होंने बाजार से हाथ खींच लिए। जैनुअन बायर के हटते ही बाजार में मंदा आ गया। अब जब रेट ठीक हो गए हैं तो ये जैनुअन बायर एक बार फिर बाजार में लौटने लगे हैं। अब जो खरीददार बाजार में बचे हैं वो जेनुअन बायर हैं। वे मांग और आपूर्ति पर नजर रखकर ही खरीददार कर रहे हैं।

सुधर रही है निर्यात मांग

एक सप्ताह में 400 रुपए टूटने के बाद अब बासमती चावल में लगभग 500 रुपए का उछाल आ चुका है। चावल में निर्यातकों की मांग सुधर रही है। चावल 1509 सेला हरियाणा में 5200/5300 रुपए बोलने लगे। यूपी में 5100 रुपए का व्यापार हो गया तथा दादरी लाइन की मिलें 5125 रुपए बोलने लगी हैं।


बुधवार को हरियाणा में बासमती 1509 के भाव 2800 रुपए तक बिका। पंजाब में यह 2850 तक था। यूपी की मंडियों में भी 1509 2750 तक बोला गया। बुधवार को हरियाणा के सिरसा में पीबी वन 2857 1509 2721 जींद 1121 3025 1509 2931 सफीदो 1121 3270 1509 2936 रतिया पीबी वन 3100 1121 2900 1509 2790 फतेहाबाद 1121 3211 1509 2774 पीबी वन 2904 कैथल में 1121 3270 डीपी 1401 2870 1509 2870 रुपए तक बिका। पंजाब के अमृतसर में 1121 3020 1509 2860 रुपए बिका। वहीं मंगलवार को करनाल में 1509 2821 1121 3000 डीपी 3000 तथा दिल्‍ली के नरेला में मंगलवार को 1121 3200 और 1509 2800 रुपए तक बिका।


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बासमती 1121 में तेजी के आसार

पिछली बार अच्‍छे भाव न मिलने और प्रति एकड़ उत्‍पादन कम होने से हरियाणा और पंजाब के किसानों का इस बार बासमती 1121 से मोहभंग हो गया। इस बार 1121 का उत्‍पादन लगभग 40 फीसदी कम होगा। नीरज का कहना है कि इस बार बासमती 1121 का कैरी आवर स्‍टॉक नहीं है। इसलिए मांग ज्‍यादा होगी और आपूर्ति कम। यह स्थिति भाव को बढ़ाएगी। डीपी 1401 और पीबी वन के भाव भी अच्‍छे रहने के आसार हैं।


नीरज शर्मा का कहना है कि 1121 अगर अंडर 3000 रुपए खुलती है तो इस रेट पर बाजार में स्‍टॉक करने वाले बहुत ट्रेडर हैं। 3000 के भीतर रेट खुलने पर लगभग हर ट्रेडर स्‍टॉक कर सकता है। वहीं अगर 1121 3200-3500 खुलती है तो इस रेट पर हर ट्रेडर स्‍टॉक नहीं कर सकता। इतने उंचे रेट पर स्‍टॉक करने वाले बाजार में बहुत कम व्‍यापारी हैं। ट्रेडर को 3200-3500 वाला धान खर्चे सहित 3700-4000 पड़ता है। स्‍टॉक किया धान 4500-5000 बिकने पर ही उसे मुनाफा होता है। नीरज शर्मा का कहना है कि इस सीजन 1121 3500 रुपए तक बिक सकती है। 3000 हजार के भीतर रेट खुलने पर हर व्‍यापारी अपनी हैसियत अनुसार माल का स्‍टॉक करेगा। मिलर्स और एक्‍पोर्टर्स भी इस रेट पर अच्‍छी खरीदारी करेंगे।

कम है बुआई

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल बासमती धान की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 8 फीसदी कम हुई है, जबकि धान की कुल बुआई करीब तीन फीसदी कम हुई है। वर्ष 2016 में बसमाती उत्पादक प्रमुख राज्यों में बासमती का कुल रकबा 16.89 लाख हेक्टेयर था जो इस साल यानी 2017 में घटकर 15.55 लाख हेक्टेयर रह गया।


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सरकार ने भी माना कम होगा उत्‍पादन

सरकार द्वारा जारी खरीफ फसलों के पहले पूर्वानुमान में कहा गया है कि खरीफ चावल का कुल उत्‍पादन 94.48 मिलियन टन तक अनुमानित है। यह विगत वर्ष के 96.39 मिलियन टन रिकार्ड उत्‍पादन की तुलना में 1.91 मिलियन टन कम है। हालांकि यह आंकड़ा सभी तरह के चावल का है। विशेषज्ञों का मानना है इस 1.91 लाख टन की कमी में बड़ा हिस्‍सा बासमती का है।

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