आखिर चमगादड़ पर क्यों नहीं होता निपाह वायरस का असर? ये है लॉजिक

Nipah, निपाह

इन्‍फोपत्रिका डेस्‍क


केरल में फैले निपाह वायरस का खौफ पूरे देश में है। ऐसा माना जा रहा है कि केरल में निपाह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में आया है। चमगादड़ 60 अत्‍यंत खतरनाक वायरसों का वाहक है। इसका मतलब है कि चमगादड़ के शरीर में 60 वायरस हमेशा मौजूद रहते हैं। खास बात ये है कि इतने खतरनाक वायरस अपने शरीर में लिए घूम रहे चमगादड़ खुद इन वायरसों का शिकार नहीं होते। उन पर ये असर नहीं करते और न ही चमगादड़ों में इनसे बीमारियां फैलती हैं।


Nipah, निपाह

Nipah और इबोला सहित इन वायरसों का है वाहक

चमगादड़ 60 अत्‍यंत खतरनाक वायरसों का वाहक है। चमगादड़ के शरीर में निपाह, इबोला, मारबर्ग, रीवियरस, हेंड्रा, Severe acute respiratory syndrome(SARS), Middle East respiratory syndrome (MERS) और रैबीज जैसे वायरस होते हैं।चमगादड़ से इंसान में आए इन वायरसों की वजह से लाखों लोग अब तक मौत का शिकार हो चुके हैं। 1930 में रैबीज चमगादड़ों से इंसान में आया। 1996 में चमगादड़ों की वजह से ही आस्‍ट्रेलिया में हेंड्रा नाम वायरस फैला। 1998 में चमगादड़ ही मलेशिया में फैले निपाह वायरस का कारण था। 2003 में चीन में SARS वायरस इंसानों में फैला। इंसानों तक इस वायरस को चमगादड़ ने ही पहुंचाया था। भारत में निपाह वायरस को इंसानों में सबसे पहले पश्चिमी बंगाल में भी चमगादड़ों ने पहुंचाया था। अब केरल में निपाह भी इनकी वजह से इंसानों में फैला है।

चमगादड़ खुद क्‍यों नहीं आता चपेट में

Nipah, निपाह
अब सवाल ये है कि आखिर चमगादड़ के पास ऐसे कौन से कवच-कुंडल है जो ये इन खतरनाक वायरसों के आक्रमण का शिकार नहीं होता, जबकि ये वायरस उसके शरीर में ही रहते हैं। मशहूर जर्नल Emerging Infectious Diseases में छपे एक शोध के अनुसार चमगादड़ों के अपने शरीर में पाए जाने वायरसों की चपेट में न आने का कारण है उसका हवा में उड़ना। चमगादड़ एकमात्र वो स्‍तनधारी जानवर है जो उड़ सकता है। जब यह उड़ान भरता है तो यह अपनी मेटाबॉलिक रेट को बढा देता है। उड़ने से इसके शरी का तापमान भी बढ जाता है। उड़ते वक्‍त चमगादड़ के शरीर का तापमान 100 से 105 डिग्री फारनहाईट हो जाता है। शरीर का बढा हुआ तापमान और ऊंची मेटाबॉलिक दर चमगादड़ की रोगप्रतिरोध प्रणाली को सक्रिय कर देता है। इससे रोगप्रतिरोधक क्षमता बहुत बढ जाती है।


शोध के अनुसार चमगादड़ रोजाना उड़ान भरते हैं। इससे रोज उनके शरीर का तापमान बढता है। बढा हुआ तापमान चमगादड़ के शरीर में पाए जाने वाले रोगजनकों को इतना सक्रिय ही नहीं होने देता कि वे चमगादड़ के शरीर में कोई संक्रमण पैदा कर सके।


U.S. Geological Survey और Zoological Society of London का कहना है चमगादड़ों की जीवनशैली अन्‍य स्‍तनधारियों से अलग होती है। ये लंबी उड़ान भरते हैं। लंबी शीतनिंद्रा (hibernation) में चले जाते हैं। इनका सामाजिक व्‍यवहार भी अन्‍य स्‍तनधारियों से अलग होता है। इन सबके कारण चमगादड़ों ने अपने आपको इतना ताकतवर बना लिया है कि 60 खतरनाक वायरसों का वाहक होते हुए भी ये खुद इनका शिकार नहीं होता।

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