खट्टर ने इसलिए बोला था कुलदीप बिश्‍नोई पर तीखा हमला

Kuldeep Bishnoi v/s Khattar

इन्‍फोपत्रिका डेस्‍क


आमतौर पर अपने राजनीतिक विरोधियों पर व्‍यक्तिगत हमला करने से बचने वाले हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल ने कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्‍यमंत्री भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्‍नोई पर जोरदार हमला पिछले दिनों बोला। कुलदीप बिश्‍नोई के गढ आदमपुर में मुख्‍यमंत्री ने चौधरी भजनलाल को जननेता बताया वहीं कुलदीप बिश्‍नोई को अपने बाप की खिलाफत करने वाला बेटा घोषित कर दिया। मुख्‍यमंत्री ने कहा कि कुलदीप बिश्‍नोई सपूत नहीं हैं। उनके इस हमले से कुलदीप समर्थक भले ही लाल-पीले हो रहे हों लेकिन हरियाणा कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता को मुख्‍यमंत्री खट्टर के इस बयान से गुस्‍सा नहीं आया है।


कुलदीप पर मुख्‍यमंत्री के इस निजी हमले के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्‍यमंत्री और भाजपा को यह पता था कि कुलदीप पर किए गए किसी भी निजी वार से कुलदीप को बचाने कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता नहीं आएगा। भाजपा कुलदीप समर्थकों को यह संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस में कुलदीप अलग-थलग पड़ गए हैं। उनका कांग्रेस में जाने का फैसला गलत था और उन्‍हें वहां कुछ हासिल नहीं होगा।


Kuldeep Bishnoi v/s Khattar
भाजपा की रणनीति कुछ हद तक सफल भी होती दिख रही है। मुख्‍यमंत्री के सपूत-कपूत वाले बयान के तीन दिन बीत जाने के बाद भी किसी कांग्रेसी दिग्‍गज ने भाजपा और मुख्‍यमंत्री की आलोचना नहीं की है। इसके अर्थ यही निकाले जा रहे हैं कि कांग्रेस में फिलहाल कुलदीप बिश्‍नोई अकेले ही अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं।

हुड्डा चुप, तंवर खामोश और सुरजेवाला शांत

कुलदीप बिश्‍नोई के समर्थन में कांग्रेस का न कोई बड़ा नेता अभी तक आया है। कुलदीप की धर्मपत्‍नी और हांसी से विधायक रेणुका बिश्‍नोई, कुलदीप के भाई चंद्रमोहन और पूर्व संसदीय सचिव दूड़ाराम ही वो बड़े नाम हैं जो खट्टर के विरोध में उतरे हैं। ये सभी कुलदीप के पारिवारिक सदस्‍य हैं। आजकल कुलदीप कांग्रेस के हुड्डा खेमे में हैं। लेकिन हुड्डा गुट के किसी भी बड़े नेता ने खट्टर के कुलदीप पर वार का विरोध नहीं किया है। इसी तरह कांग्रेस प्रदेशाध्‍यक्ष अशोक तंवर भी अपने नेता के बचाव में नहीं आए हैं। रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी जैसे नेता भी इस मामले पर चुप्‍पी साधे हुए हैं।

आदमपुर पर नहीं है भाजपा की नजर

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कुलदीप को आदमपुर में हराना भाजपा की रणनीति का हिस्‍सा नहीं है। भाजपा के रणनीतिकार यह अच्‍छी तरह जानते हैं कि चौधरी भजनलाल की साख और कार्यों के कारण कुलदीप को आदमपुर में हराना फिलहाल नामुमकिन है। न ही वहां भाजपा के पास कोई ऐसा नेता है जो कुलदीप को कड़ी टक्‍कर दे सके। भाजपा की नजर चौधरी भजनलाल के उस वोट बैंक पर है जो आदमपुर विधानसभा से बाहर पूरे हरियाणा में फैला हुआ है और जिसे कुलदीप बिश्‍नोई संभाल नहीं पा रहे हैं। ये वो वोट बैंक है जो कभी भी इनेलो को वोट नहीं करता है और चौधरी भजनलाल को मुख्‍यमंत्री न बनाने की खुन्‍नस अभी भी कांग्रेस से रखे हुए है। कुलदीप बिश्‍नोई के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से हाथ मिलाने से भी वे खफा हैं।


कुलदीप के कांग्रेस में जाने और अब हुड्डा से हाथ मिलाने के कारण वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। भाजपा उनके लिए एक अच्‍छा विकल्‍प हो सकती है। इसी को देखते हुए भाजपा अब उन पर डोरे डाल रही है। फतेहाबाद, टोहाना और नलवा विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने चौधरी भजनलाल समर्थकों में अपना आधार कुछ बढाया भी है। चौधरी भजनलाल समर्थकों में अगर यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस में कुलदीप बिश्‍नोई कोई बड़ी जिम्‍मेदारी नहीं मिलेगी तो उनका दूसरी पार्टियों की ओर जाना संभव है। ऐसे में उनकी पहली पसंद भाजपा हो सकती है।

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