अगले कुछ दिनों में दूध और सब्‍जी हो जाएगी बाजार से गायब!

Gaon bandh

इन्‍फोपत्रिका डेस्‍क


गांव बंद। जी हां, यही नाम है किसानों द्वारा किए जाने वाले दस दिवसीय आंदोलन का। 1 जून से 10 जून तक किसान न तो शहरों में दूध देंगे और न ही सब्‍जी की सप्‍लाई करेंगे। देशव्‍यापी आंदोलन की शुरूआत आज से हो चुकी है। किसान सड़कों पर खड़े हैं। वे वाहनों की तलाशी ले रहे हैं। अगर कोई व्‍यक्ति शहर दूध और सब्‍जी ले जाता पकड़ा जाता है तो उसके माल को सड़कों पर फैंका जा रहा है। गांव बंद आंदोलन का असर पंजाब, हरियाणा, राजस्‍थान और मध्‍यप्रदेश में ज्‍यादा देखा जा रहा है।


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Image : Whatsapp

क्‍या होगा इसका असर

गांव बंद आंदोलन से दूध और सब्जियों की आपूर्ति में भारी गिरावट आने का अंदेशा है। अगर ऐसा हुआ तो शहरों में रहने वाले लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। शहरों में गांवों से ही सब्‍जी और दूध आता है। प्राइवेट कंपनियां भी गांवों से दूध एकत्रित कर शहरों में पैकेट वाला दूध बेचती है। किसानों ने अब गांवों में भी प्राइवेट कंपनियों को देना बंद कर दिया है।


अगर गांव बंद आंदोलन सफल रहा तो 3 जून के बाद शहरों में सब्जियों और दूध की भारी किल्‍लत हो जाएगी। तीन दिन तक तो स्‍टॉक और कोल्‍ड स्‍टोरर्स में पड़ी सब्जियों से काम चल जाएगा लेकिन बाद में अगर सप्‍लाई चालू न हुई तो भारी दिक्‍कत हो जाएगी। कुछ शहरों में तो एक जून को ही सब्जियों के दाम बढ गए क्‍योंकि सब्‍जी मंडियों में आज से ही सप्‍लाई कम हो गई है।


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दूध को लेकर सबसे ज्‍यादा दिक्‍कतों क सामना करना पड़ेगा। सब्जियों की जगह तो दाल बनाकर भी काम चलाया जा सकता है, लेकिन दूध का विकल्‍प नहीं है। अगर दूध की भारी किल्‍लत हुई तो मिल्‍क पाउडर से लोगों को काम चलाना पड़ेगा। लेकिन बाजार में इतना दूध पाउडर भी नहीं है कि सभी की जरूरतें इससे पूरी हो जाए।

क्‍या करें शहरी उपभोक्‍ता

अभी बाजार में सब्जियां और दूध मिल रहे हैं। शहरी उपभोक्‍ताओं को अपनी जरूरत की पांच-सात दिन की ऐसी सब्‍जी अभी से खरीद लेनी चाहिए, जो जल्‍दी खराब नहीं होती। पैकेट वाला दूध भी फ्रीज में तीन दिन तक खराब नहीं होता, उसे भी रख लेना चाहिए। इसके अलावा दूध पाउडर का इंतजाम भी करके रखें तो ठीक है। छोटे बच्‍चों को पिलाने के लिए पैकेज्‍ड जूस आदि घर में जरूर ले आएं ताकि दूध न होने पर इसे बच्‍चों को पिलाया जा सके।

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