12 साल से छोटी बच्ची से रेप पर ही मौत क्यूं? सब रेपिस्टों को क्यों नहीं?

death for rape in india ordinance

इन्फोपत्रिका, नई दिल्ली.
यदि किसी 13 साल की बच्ची से रेप होता है और सरकार के बनाए गए कानून का पालन करते हुए 2 महीने में जांच हो जाती है. और जांच में ये साबित हो जाता है कि रेप हुआ है तो दोषी को मौत की सजा क्यों नहीं? ये एक आसान-सा सवाल है जो उठाया जाना चाहिए. दरअसल, केंद्रीय मंत्रीमंडल ने शनिवार को 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के दोषियों को न्यूनतम 20 साल और अधिकतम सजा-ए-मौत देने को मंजूरी दे दी. इस बारे में जल्द ही अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) लाया जाएगा.

जो मुद्दा इन्फोपत्रिका ने कल (शनिवार को) उठाया था, उसी मुद्दे पर जानी मानी लेखिका तसलीमा नसरीन ने आज (रविवार को) ट्वीट करते हुए अपनी चिंता जाहिर की है. उन्होंने लिखा है कि अब मुझे 12 साल से ज्यादा उम्र की लड़कियों की चिंता सता रही है. उनका ट्वीट ये है –

अध्यादेश को पास करेंगे राष्ट्रपति

नाबालिगों से रेप की बढ़ती घटनाओं और देशभर में उठ रहे विरोध के स्वरों को सुनने के बाद मोदी सरकार ने आखिर एक अच्छा फैसला लिया। सरकार जो अध्यादेश लाने जा रही है, उसे रेप के खिलाफ कठोरतम कदम माना जा सकता है. 12 साल के कम उम्र की लड़की से रेप पर फांसी की सजा. ये अध्यादेश आने के बाद इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा.

इसी अध्यादेश में एक बात ये भी कही गई है कि इस तरह के अपराध के केस की जांच महज 2 महीने में पूरी करनी होगी.

बाकी क्या प्रावधान हैं, वह भी जानिए

12 साल से कम उम्र की लड़की से रेप के दोषी को कम से कम 20 साल की जेल या उम्रकैद या मौत की सजा दी जाएगी.
16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप करने वाले की न्यूनतम सजा को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल होगी. दोषी को उम्रकैद भी हो सकती है.
अध्यादेश जारी होते ही 12 साल से कम उम्र के बच्चों से रेप के दोषी को अदालतें मौत की सजा दे सकेंगी.

रेप चाहे किसी भी उम्र की महिला से हो, रेपिस्ट को फांसी ही मिलनी चाहिए. क्या आप इससे सहमत हैं?

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