एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी माना, रोहिंग्‍या ही हैं हिन्‍दुओं के नरसंहार के जिम्‍मेदार

Rohingya Massacred Hindu Civilians

इन्‍फोपत्रिका डेस्‍क


पिछले करीब एक साल से भारत के हिन्‍दू संगठन और म्‍यांमार की सरकार म्‍यांमार में 100 हिन्‍दुओं के नरसंहार के लिए रोहिंग्‍या मुसलमानों को जिम्‍मेदार ठहरा रहे थे. लेकिन उनके दावे को अब तक झूठा बताया जा रहा था. लेकिन अब मानवाधिकारों के काम करने वाली संस्‍था एमनेस्‍टी इंटरनेशनल ने भी अब कह दिया है कि हिन्‍दुओं के कत्‍लेआम में रोहिंग्‍या आतंकवादियों का हाथ था. एमनेस्‍टी इंटरनेशनल ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि म्‍यांमार के हिंसाग्रस्‍त रखाइन प्रांत के दो हिन्‍दू बहुल गांवों पर रोहिंग्‍या आतंकियों ने पिछले साल अगस्‍त में हमला किया और 23 बच्‍चों सहित करीब 100 हिन्‍दू पुरुषों और महिलाओं की हत्‍या कर दी. रखाइन और बांग्लादेश की सीमा पर दर्जनों लोगों के इंटरव्यू और फ़ोरेंसिक पैथलॉजिस्ट्स द्वारा तस्वीरों की जांच के बाद ही एमनेस्‍टी ने अपनी ये रिपोर्ट जारी की है.


रखाइन प्रांत में मिली हिन्‍दुओं की एक सामूहिक कब्र के पास विलाप करती एक हिन्‍दू महिला।

हिंदू बहुल गांवों पर हुआ था हमला

मशहूर अंतरराष्‍ट्रीय पत्रिका TIME की वेबसाइट पर छपी एक खबर में बताया गया है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बांग्लादेश और रखाइन में कई इंटरव्यू किए, जिनसे पुष्टि हुई कि अराकान रोहिंग्या सैलवेशन आर्मी (आरसा) ने ये हत्याएं की थीं. यह नरसंहार उत्तरी मौंगदा कस्बे के पास के गांवों में हुआ था.

बंधक बनाया और काट दिया गला

एमनेस्‍टी की रिपोर्ट में इस बात का भी ज़िक्र है कि कैसे रोंहिग्‍या मुसलमानों के आतंकी संगठन आरसा के सदस्यों ने 26 अगस्त को हिंदू गांव ‘अह नौक खा मौंग सेक’ तथा ये बौक क्यार पर हमला किया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्रूर और बेमतलब हमले मे आरसा के सदस्यों ने बहुत सी हिंदू महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को पकड़ा और गांव के बाहर ले जाकर तेजधार हथियारों से उनका गला काट दिया।

पहले पुरुषों को मारा, फिर महिलाओं और बच्‍चों को

‘अह नौक खा मौंग सेक’ गांव की रहने वाली 18 वर्षीय राजकुमारी ने एमनेस्‍टी इंटरनेशनल के बताया कि उनके गांव पर करीब सुबह आठ बजे हमला हुआ. रोहिंग्‍या आतंकवादी काले कपड़े पहने थे और और उनके पास चाकू, भाले और लोहे की राड थी. उन्‍होंने महिलाओं, बच्‍चों और पुरुषों को बंधक बना लिया और गांव के बाहर ले गए। कुछ लोग उनसे बचकर भाग गए और झाि‍ड़यों में छिप गए। राजकुमारी ने बताया कि उन्‍होंने पहले पुरुषों के गले काटे और फिर बच्‍चों और महिलाओं की बेरहमी से हत्‍या कर दी। अह नौक खा मौंग गांव में 56 लोगों को मौत के घाट उतारा गया। मरने वालों में 20 पुरुषों, 13 महिलाओं और 23 बच्‍चे शामिल थे। 23 बच्‍चों में से 14 की उम्र तो 8 साल से भी कम थी.


एमनेस्टी की जांच में संकेत मिले हैं कि हिंदू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का ‘ये बौक क्यार’ गांव में उसी दिन नरसंहार हुआ था, जिस दिन ‘अह नौक खा मौंग सेक’ पर हमला किया गया था. ये बौक क्‍यार में करीब 44 लोगों को मौत के घाट उतारा गया।

किसी ने नहीं सुनी म्‍यांमार सरकार की बात

Rohingya carried out mascare of hind
सितंबर 2017 में बड़े स्तर पर रोहिंग्या मुसलमान भागकर बांग्लादेश आए थे. उन्होंने म्यांमार के सुरक्षा बलों द्वारा किए गए अत्याचारों की दास्तां सुनाई थी. ठीक उसी समय म्यांमार की सरकार ने एक सामूहिक क़ब्र मिलने का दावा किया था. सरकार का कहना था कि मारे गए लोग मुसलमान नहीं, हिंदू थे और उन्हें आरसा के चरमपंथियों ने मारा है. पत्रकारों को क़ब्रों और शवों को दिखाने के लिए ले जाया गया था. म्यांमार को शिकायत थी कि रखाइन से एकतरफ़ा रिपोर्टिंग की जा रही है. रखाइन में रोहिंग्‍या आतंकवादी बौद्ध और हिन्‍दुओं का नरसंहार कर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया इस बात को मानने को तैयार नहीं है।

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