जानिये कौन सा ब्लड ग्रुप है बड़े काम का

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रविन्द्र कुमार सैनी / इन्फोपत्रिका
आपने बहुत से स्लोगन पढ़े होंगे जैसे रक्तदान महादान। आपका रक्त दूसरों का जीवन है। यदि करनी हो मानव सेवा, रक्तदान है उत्तम सेवा आदि। वाकई में रक्तदान बहुत ही महान कार्य है। लेकिन रक्त से जुड़ी बहुत सारी भ्रांतियां है जो अब धीरे-धीरे दूर हो रही है और लोग रक्तदान के लिए लगने वाले शिविरों में आगे आने लगे हैं। लेकिन क्या आप जानते हमारा रक्त कई प्रकार के ग्रुपों में बंटा है और कौन से ग्रुप का रक्त किस ग्रुप के काम आ सकता है।

1900 में खोजे ग्रुप

A,B,O ब्लड ग्रुप की खोज आस्ट्रियन वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टेनर ने 1900 में की थी। लैंडस्टेनर को 1930 में साइक्लोजी और मेडिसिन के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। तीन प्रकार के ब्लड ग्रुप खोजे जाने के 2 साल बाद अल्फ्रेड वॉन डिकास्टेलो और एड्रिनो स्टरली ने इसके चौथे प्रकार AB की खोज की थी।

रक्त में शामिल हैः-

1. लाल रक्त कणिकाए हमारे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह करती है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड को खत्म करती है।
2. सफेद रक्त कणिकाएं संक्रमण से लड़ती है।
3. प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनाने में मदद करता है।
4. प्लाजमा में साल्ट और अन्य प्रोटीन होते हैं।

O- बल्ड ग्रुप सबसे महत्वपूर्ण

वैसे तो रक्त को 8 ग्रुपों में बांटा गया है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण O- है। क्योंकि इस ग्रुप के शख्स का रक्त सभी ग्रुपों के काम आ सकता है। लेकिन इस ग्रुप के व्यक्ति को अगर रक्त की जरूरत पड़ जाए तो इसे सिर्फ O- ग्रुप के शख्स का ही रक्त चढ़ाया जा सकता है। इसलिए O- ब्लड ग्रुप वाले को यूनिवर्सल डोनर भी कहा जाता है।


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Image : Infopatrika.com

O+ सबसे ज्यादा और सबसे AB- ग्रुप का रक्त दुर्लभ

O+ ग्रुप का रक्त सबसे ज्यादा पाया जाता है। जबकि AB- ग्रुप का रक्त बहुत ही कम पाया जाता है। इसलिए इसे दुर्लभ की श्रेणी में रखा गया है। जबकि रक्तदान का कैं लगता है तो उसमें और ग्रुप के रक्तधारकों को प्राथमिकता दी जाती है। इस सिक्वेंस से समझ सकते हैं कि कौन से ग्रुप ज्यादा मिलता है और कौन से कम।
O+ > O- > A+ > A- > B+ > B- > AB+ > AB-

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