सोते समय सांसों का रुक-रुककर आना : जानिए कारण, लक्षण और उपचार

sleep apnea | स्लीप एपनिया

इन्फोपत्रिका, हेल्थ डेस्क.
स्लीप एपनिया. यह नाम है एक ऐसी बीमारी का जो बहुत खतरनाक है. इस बीमारी में लोगों को सोते हुए सांस लेने में रुकावट पैदा होती है. इसमें सोते हुए व्यक्ति को सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होती है या फिर उनकी सांसे रुकने लगती हैं तो संभवत उसे ये बीमारी हो सकती है. कहा जाता है कि कई बार तो एक रात में सैकड़ों बार व्यक्ति की सांसें अटकती हैं. यकीनन यह कोई आम बीमारी नहीं है, जिसे की नजर अंदाज किया जा सके. आज हम आपको इसकी पूरी जानकारी देंगे. ये आर्टिकल आपको अंत तक पढ़ना है.

कब होती है स्लीप एपनिया

स्लीप एपनिया | Sleep apnea
image source : upliftingmobility.com

यह बीमारी तब होती है जब गले की मांसपेशियां नियमित रूप से काम करना बंद कर जाती है. जाहिर है इससे सांस लेने में तकलीफ तो होगी ही. और बात केवल यहीं तक नहीं रुकती, इसके बाद मनुष्य को हाई ब्लड प्रेशर और दिल की अन्य बीमारियां भी होने लगती है.

जिस भी व्यक्ति को यह बीमारी होती है उसे रात में किसी भी समय दिल का दौरा या फिर ब्रेन अटैक हो सकता है. इसके पीछे वजह यह है की उस मनुष्य के दिमाग और अन्य शरीर में पूरी तरह से ऑक्सीजन का प्रवाह नहीं बन पाता है. और ऑक्सीजन का ना मिलना मतलब मौत.

दो तरह का होता है स्लीप एपनिया

1. ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA)- यह स्लिप एनीमिया का ज्यादा कॉमन प्रकार है. मतलब ज्यादातर लोगों में यही पाया जाता है. इसमें मुख्यत सोते समय गले के अंदर बने सॉफ्ट टिशूज आसानी से खत्म हो जाते हैं.

2. सेंट्रल स्लीप एपनिया (CSA)- यह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया से अलग है. यह वायु दबाव या सांसों को रोकता नहीं है बल्कि इसमें मस्तिष्क शरीर के बाकी हिस्सों को सिग्नल नहीं दे पाता है और इसकी वजह से सांस लेने में समस्या हो सकती है.

किसे प्रभावित कर सकती है ये बीमारी

स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती है. कई बार तो इसे बच्चों में भी देखा गया है. वैसे मुख्य तौर पर यह बीमारी निम्नलिखित तरह के लोगों में होने की आशंका ज्यादा रहती है-

1. यदि आप पुरुष हैं तो.
2. ये आपका वजन जरूरत से ज्यादा है तो.
3. यदि आप 40 की उम्र पार कर चुके हैं तो.
4. यदि आपकी गर्दन का साइज बड़ा है तो (पुरुषों की गर्दन 17 इंच या उससे ज्यादा होना और महिलाओं की गर्दन 16 इंच या उससे ज्यादा होना).
5. यदि किसी के टॉन्सिल्स ज्यादा बड़े हैं या जीभ बड़ी हो या फिर जबड़े की हड्डी छोटी हो.
6. यदि किसी के परिवार में पहले से स्लीप एपनिया की बीमारी हो.
7. एलर्जी साइनस यह किसी अन्य वजह से किसी की नाक में सांस लेने में बाधा उत्पन्न होती हो तो भी यह बीमारी होने की आशंका बनी रहती है.

स्लीप एपनिया से क्या प्रभाव पड़ता है

यदि समय पर स्लीप एपनिया का इलाज ना करवाया जाए तो इससे स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों में इजाफा हो सकता है, जिस में निम्नलिखित चीजें शामिल हैं-

इसमें हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, हृदय गति का असामान्य होना और हार्ड अटैक, डायबिटीज, डिप्रेशन या फिर भयंकर सिर दर्द भी हो सकता है. और केवल इतना ही नहीं है यदि इसका इलाज नहीं करवाया जाए तो यह आपकी दिनचर्या को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है.

ये भी पढ़ें- बिस्तर में टाइम बढ़ाने की कुदरती दवा

आखिर इसके होने का पता कैसे चलता है?

इस बीमारी के कुछ लक्षण है और उन्हीं लक्षणों के आधार पर पता लगाया जा सकता है कि किसी भी व्यक्ति को स्लीप एपनिया है या नहीं. कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं-

1. सुबह उठने पर यदि गला बहुत सूखा हुआ हो.
2. यदि रात को बहुत जोर जोर से खर्राटे आते हो.
3. अक्सर गला रुकने जैसी समस्या के चलते रात में उठ जाते हों.
4. दिनभर शरीर में थकान और नींद आना. रात को अच्छे से नए सो पाना.
5. ड्राइविंग करते वक्त नींद आना.
6. सुबह उठने पर सिर दर्द होना.
7. शादीशुदा लोगों का अपने पार्टनर में दिलचस्पी ना होना और सेक्स में भी रूचि खत्म हो जाना.

sleep-apnea symptoms

लक्षण दिखे तो क्या करें?

यदि आपको इनमें से एक भी लक्षण नजर आता है तो आपको अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. डॉक्टर सबसे पहले आपको इससे संबंधित टेस्ट करवाने को कह सकते हैं. टेस्ट जरूर करवाएं और यदि कोई वहम हो तो उसे दूर कर लें. और यदि यह वहम नहीं है तो इसका इलाज करवाएं. दरअसल कई प्रकार के टेस्ट होते हैं मगर जो मुख्य टेस्ट होता है उसका नाम है-पॉलीसोम्नोग्राम. इस टेस्ट के जरिए पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को यह स्लीप डिसऑर्डर है या नहीं.

ये भी पढ़ें – बालों का गिरना चिंता का विषय है, गौर करें

घर पर कर सकते हैं ये काम

हालांकि डॉक्टरी तौर पर स्लीप एपनिया का इलाज लंबा चलता है मगर आप घर पर रहकर भी कुछ दिनचर्या बदलकर कैसे बचे रह सकते हैं-

1. अपना वजन कम करने की कोशिश करें.
2. शराब ना पीएं और नींद की कोई दवा ना लें.
3. सोते वक्त अपनी पोजीशन बदलते रहें ताकि सांस लेने में तकलीफ ना हो.
4. यदि आप सिगरेट पीते हैं तो तुरंत छोड़ दें क्योंकि यह आपकी सांस को रोकने के लिए काफी है.

loading...