सावधान! अस्थमा (दमे) का मरीज बना रहे हैं घरों के सुंदर पर्दे और कालीन

curtains may cause ashtma

इन्फोपत्रिका, नई दिल्ली.
घर की सजावट करने के लिए पर्दों और सुंदर कालीनों का होना जरूरी माना जाता है. बेशक इनके इस्तेमाल से घर सुंदर लगने लगते हैं, मगर इसके साइड-इफेक्ट ऐसे हैं कि जीवनभर का रोग दे सकते हैं. दरअसल, डॉक्टरों का मानना है कि कारपेट और पर्दे आपको अस्थमा का रोगी बना सकते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि घर में बिछाए गए कारपेट और पर्दों में वायरस और फंगस मौजूद होते हैं. ये वायरस और फंगस अस्थमा पनपने का वातावरण पैदा करते हैं.

पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी

घर के कारपेट और पर्दों पर हवा चलने की वजह से मिट्टी जमने लगती है. मिट्टी को झाड़ू से साफ कर दिया जाता है या कपड़े से झाड़ दिया जाता है. हालांकि झाड़ने के बावजूद पर्दों में धूल और बैक्टीरिया फंसे रह जाते हैं. इनके जमने से सांस लेने पर यह बैक्टीरिया शरीर के अंदर चले जाते हैं, जिससे अस्थमा हो सकता है. आंकड़ों पर यकीन किया जाए तो भारत में 10 में से एक व्यक्ति अस्थमा का रोगी है.

तो क्या किया जा सकता है कि रोग न लगे

यदि आप घर में कारपेट और पर्दे लगाने ही चाहते हैं तो उनकी सफाई का पूरा ध्यान रखें. संभव हो तो वैक्यूम क्लीनर से सफाई करें. पर्दों और कालीन को समय-समय पर धूप दिखाते रहें. यदि घर में कोई अस्थमा का मरीज हो तो उसे पर्दों से दूर रखें.

इन लक्षणों को इग्नोर न करें

यदि किसी व्यक्ति की सांस लगातार फूल रही हो तो इसे कतई नजरअंदाज न करें. इसके अतिरिक्त सांस लेने पर छाती से आवाज आने पर, लंबे समय से खांसी होने या मौसम बदलने पर सांस की तकलीफ होने पर जरूर डॉक्टर के पास जाएं.

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