केला और आम का स्‍वाद कहीं आपको न बना दे निपाह वायरस का शिकार

रविन्‍द्र कुमार सैनी/ इन्‍फोपत्रिका
निपाह वायरस से केरल में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और बहुत से लोग इसकी चपेट में है। तेलंगाना में भी एक व्‍यक्ति को अस्‍पताल में दाखिल कराया गया है। शक है कि वो भी निपाह की चपेट में है। केरल में निपाह वायरस फैलने के लिए चमगादड़ों की एक किस्‍म फ्रूट बैट को जिम्‍मेदार माना गया है। वीरवार को हिमाचल प्रदेश में भी सिरमौर जिले के एक गांव के स्‍कूल में 15 चमगादड़ रहस्‍यमय परिस्थितियों में मरे मिले। इसके बाद हिमाचल सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया। हिमाचल स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने लोगों से पेड़ से गिरे, कटे-फटे या फिर किसी पक्षी की चोंच या पंजे लगे फल न खाने की अपील की है। वहीं चिकित्‍सकों का कहना है कि अगर निपाह वायरस से बचना है तो आम, खजूर और केला का सेवन सावधानी से करना होगा।

पहले जान लें कैसे फैलता है निपाह (Nipah virus)

निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है। 1998 में यह पहली बार पहचाना गया। यह चमगादड़ों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इंसान के निपाह वायरस की चपेट में आने का कारण चमगादड़ ही था। चमगादड़ से ही यह वायरस सुअरों में आया। कई जगह सुअरों से यह संक्रमण फैला। सुअरों के मुकाबले चमगादड़ से इसके फैलने का ज्‍यादा खतरा है। सुअरों के सीधे संपर्क में आने से इंसान इसकी चपेट में आता है, लेकिन चमगादड़ एक दूसरे तरीके से भी इंसानों तक निपाह वायरस पहुंचा देता है।

चमगादड़ बिना संपर्क में आए ऐसे देता है ये बीमारी

Nipah, निपाह
Image : Infopatrika.com

केरल में जो व्‍यक्ति निपाह वायरस का शिकार हुआ उसने खजूर के पेड़ से निकलने वाले रस का सेवन किया था। जिस रस को उसने खाया था, उसमें निपाह वायरस था। ये वायरस उस रस में उस रस को चमगादड़ के चाटने के कारण पहुंचा था। होता ये है कि खजूर के पेड़ों पर चमगादड़ रहते हैं। वहां पर ये या तो खजूर के फल पर मल कर देते हैं या फिर उसे चाटकर या थोड़ा खाकर छोड़ देते हैं। इससे खजूर में चमगादड़ के शरीर में मौजूद निपाह वायरस चला जाता है।

क्या हैं निपाह (NiV) के लक्षण

Nipah, निपाह
Image : Infopatrika.com

मनुष्‍यों में निपाह वायरस, encephalitis से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है। बुखार, सिरदर्द, चक्‍कर, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत, इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं. 24-28 घंटे में यदि लक्षण बढ़ जाए तो इंसान को कोमा में जाना पड़ सकता है। कुछ केस में रोगी को सांस संबंधित समस्‍या का भी सामना करना पड़ सकता है।

केला और खजूर कैसे बन सकते हैं जानलेवा

हालांकि ताजा मामले में अभी तक किसी व्‍यक्ति के आम या केला खाकर निपाह वायरस से पीि‍ड़त होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन इन्‍हें खाते वक्‍त सावधानी बरतने की सलाह चिकित्‍सक दे रहे हैं। केरल का केला सारे भारत में सप्‍लाई होता है। उत्‍तर भारत में तो अधिकतर केला केरल से ही आता है। निपाह वायरस को फैलाने वाले चमगादड़ केरल में केले के बागों में भी पाए जाते हैं। ऐसे में यह शक जताया जा रहा है कि केले में भी निपाह वायरस हो सकता है।


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खजूर उत्‍पादन भी बड़े पैमाने पर केरल में होता है। इस समय रमजान चल रहा है। रमजान में खजूर की खपत बहुत ज्‍यादा बढ जाती है। केरल में खजूर के पेड़ों पर सबसे ज्‍यादा चमगादड़ पाए जाते हैं। इसलिए खजूर में निपाह वायरस के होने का खतरा बहुत ज्‍यादा है।

आम से क्‍यों है खतरा

निपाह वायरस वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट) उत्‍तर प्रदेश में भी पाए जाते हैं। इस बात की पुष्टि उत्‍तर प्रदेश बायोडायोवर्सिटी बोर्ड की वेबसाइट करती है। हालांकि अभी तक यूपी, हिमाचल या उत्‍तराखंड में कभी निपाह वायरस के फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि आम के बागों में भी चमगादड़ पाए जाते हैं। चमगादड़ आम पर भी अपने दांत गड़ाते हैं और उन पर मल-मूत्र कर देते हैं। इसलिए इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि आम भी निपाह वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। इसी को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने तो आम जनता से फलों से गिरे और कटे व फटे फल न खाने की अपील की है।


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अगर खाना है केला और आम तो ये करें

हम ये नहीं कह रहे कि आप केला, आम या खजूर खाना छोड़ दो। लेकिन इनको खाने से पहले सावधानी बरतें। कटा हुआ, दांतों, पंजों या अन्‍य किसी तरह से क्षतिग्रस्‍त हुआ केला और आम न खाएं। केला और आम खाने से पहले उसे अच्‍छी तरह से रगड़कर धोएं। खजूर को भी धोकर ही खाएं।

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