जिनके घर में बच्चे हैं या होने वाले हैं, वे इसे जरूर पढ़ लें

Shaken baby syndrome

इन्फोपत्रिका, हेल्थ डेस्क.
आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़ना आपके लिए बहुत-बहुत-बहुत जरूरी है. ये जानकारी बच्चों की बीमारी से जुड़ी है, मगर उस बीमारी का कारण आप या आपके आस-पास का कोई व्यक्ति भी हो सकता है. इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि ये बेहद काम की जानकारी आप शेयर भी जरूर करेंगे.

आज हम बताने जा रहे हैं शेकन बेबी सिंड्रोम (Shaken Baby Syndrome) के बारे में. ये बच्चों में होने वाली एक बीमारी है, जिसका असर बाद में होता है. इस बीमारी की वजह से बच्चों के दिमाग पर असर हो सकता है, वे दिमागी रूप से अपाहिज हो सकते हैं या अंधे या फिर उन्हें पैरालिसिस (अधरंग) हो सकती है. कई बार तो इसकी वजह से बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है.

आखिर है क्या शेकन बेबी सिंड्रोम – Shaken Baby Syndrome

शेकन बेबी सिंड्रोम के नाम से ही जाहिर है कि बच्चे को हिलाने-डुलाने से पैदा हुई एक बीमारी है. जब 1 से 2 साल तक के बच्चे को बार-बार ज़ोर-ज़ोर से हिलाया-डुलाया जाता है तो उसके दिमाग पर असर होता है. हिलाने अथवा शेक करने के दौरान बच्चे का सिर किसी वस्तु से टकराए या न टकराए, मगर ये बीमारी हो सकती है. आपने देखा होगा कुछ लोग नन्हें बच्चों को ऊपर की तरफ बार-बार उछालते हैं या फिर मालिश करते समय बहुत ज़ोर से हिलाते-डुलाते हैं. हो सकता है कि ऐसा करने से बच्चे को उस समय मज़ा आ रहा हो, मगर उस मज़े के पीछे जीवनभर की सज़ा हो सकती है.

shaken baby syndrome in hindi
Image : ePainAssist

शेकन बेबी सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को निम्न बीमारियां हो सकती हैं-
-दिमाग का विकास रूक सकता है.
-दिमारी लकवा मार सकता है.
-दिमाग स्थाई रूप से असमर्थ हो सकता है.
-अंधापन या शरीर को लकवा मार सकता है.
-मृत्यु भी हो सकती है.

क्या करें और क्या न करें

दो साल के कम उम्र के बच्चे हाई-रिस्क पर होते हैं. यदि आपका बच्चा दो साल से कम उम्र का है तो उसे कतई उछालें नहीं. मसाज करते समय ध्यान रखें कि सिर पर ज़ोर न पड़े. इस उम्र के बच्चों की देखभाल बिलकुल वैसे ही करनी चाहिए, जैसी कि नवजात या एक महीने के बच्चे की करते हैं.

यदि आप उनके साथ खेलना या मस्ती करना चाहते हैं तो ठीक है, मगर ध्यान रखें कि उन्हें बार-बार हवा में न उछालें. उनके बाजू पकड़कर हवा में घुमाएं नहीं. ध्यान रखें कि बच्चे का शरीर बहुत नाजुक है और आपकी द्वारा की गई हर गतिविधि का उस पर कुछ असर जरूर होगा.

कब दिखता है इस बीमारी का असर?

ये सिंड्रोम ऐसा है कि तुरंत दिखाई नहीं पड़ता. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वैसे-वैसे उसका असर नज़र आने लगता है. यदि आपके दिखे कि कोई बच्चा बहुत सुस्त है, चिड़चिड़ा है और सुबह जल्दी नहीं उठता है तो समझ लेना चाहिए कि वह इस सिंड्रोम से पीड़ित हो सकता है.

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