गेहूं में घास जलाने को कहीं आप भी ये तरीका तो नहीं अपना रहे

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इन्‍फोपत्रिका डेस्‍क

गेहूं में जई, गुल्‍ली डंडा और चौड़ी पत्‍ती वाले खरपतवारों को खत्‍म करना एक चुनौती बन चुका है। बहुत से खेतों में जई और गुल्‍ली डंडा टॉपिक यानि क्‍लोडीनोपोप और लीडर यानि सल्‍फोस्‍लफयूरोन से खत्‍म नहीं हो रहा है। इसके अलावा मेटस्‍लफयूरोन मिथाइल यानि एलग्रिप भी चौड़ी पत्‍ती वाले घास पर बेअसर हो रही है। किसानों ने इस समस्‍या का तोड़ ये निकाला है कि वे कई दवाओं को मिलाकर छिड़क रहे हैं। जैसे टॉपिक, लीडर और आइसोप्रोटोन या फिर टॉपिक या लीडर के साथ आइसोप्रोटोन और एलग्रिप या टू, फोर डी। इस तरह तीन दवाओं को मिलाकर छिड़काव करने की सिफारिश कृषि वैज्ञानिक नहीं करते हैं। उनका मानना है कि इस मिश्रण से फसलों को नुकसान होने की संभावना बहुत ज्‍यादा है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है की जहां तक हो सके वे इस तरह दवाओं को मिलाने से बचें।

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क्‍या करें

जहां तक हो सके खरपतवारों के नियंत्रण के लिए दो से ज्‍यादा दवाओं को मिलाकर छिड़काव न करें। अगर फिर भी कोई किसान ऐसा करता है तो उसे कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।

1 लीडर के साथ टॉपिक और एलग्रिप मिलाकर करते वक्‍त लीडर या टॉपिक में से एक की मात्रा आधी ही रखें।

2 अगर लीडर या टॉपिक के साथ एलग्रिप और टू, फोर डी दोनों मिलाते हो तो दोनों की सिफारिश की गई मात्रा के मुकाबले आधी मात्रा का प्रयोग करें। जैसे टू, फोर डी अकेले अगर 400 ग्राम एक एकड़ में प्रयोग कर रहे हों तो एलग्रिप के साथ 200 ग्राम ही प्रयोग करें।

3 लीडर, टॉपिक और आइसोप्रोटोन को कभी भी एक साथ मिलाकर न छिड़कें।

4 लीडर या टॉपिक के साथ आइसोप्रोटोन मिलाकर छिड़काव करते वक्‍त आइसोप्रोटोन की मात्रा कम रखें।

4 तीन खरपतवारनाशकों का एक साथ प्रयोग करते वक्‍त प्रति एकड़ पानी की मात्रा बढा लें। जैसे अगर टॉपिक और एलग्रिप 125 लीटर पानी के साथ एक एकड़ में छिड़काव करते हो तो तीसरी दवा मिलाते ही कम से कम पचास लीटर पानी बढा लें।

5 एकसार छिड़काव करें। यह ध्‍यान रखें की गेहूं में कहीं भी दोबारा स्‍प्रे न हो। अगर ऐसा होगा तो गेहूं के पत्‍ते जल जाएंगे।
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