अगर नहीं पड़ी गर्मी तो सूख जाएगा तीन राज्‍यों का “गला”

Water crisis

इन्‍फोपत्रिका डेस्‍क


हिमाचल प्रदेश में इस बार तापमान कम चल रहा है। इससे यहां पर आने वाले सैलानियों के चेहरे जरूर खिले हैं लेकिन इससे हरियाणा, पंजाब और राजस्‍थान की सरकारों के माथे पर चिंता की लकीरें उकेर दी हैं। हिमाचल में गर्मी न होने से पहाड़ों पर बर्फ तेजी से नहीं पिघल रही। इससे भाखड़ा और पौंग बांध में उतना पानी नहीं पहुंच रहा, जितना इस समय पहुंचना चाहिए। तीनों राज्‍य पानी की कमी से जूझ रहे हैं। अगर जल्‍द ही हिमाचल प्रदेश में सूर्य देवता ने अपना असली रूप नहीं दिखाया तो खेती की तो छोि‍ड़ए पीने के पानी के भी लाले पड़ सकते हैं।

ऐसी है बांधों की स्थिति

तापमान कम होने से बर्फ को पिघलने का मौका नहीं मिल रहा और मार्च से जून के बीच बर्फ पिघलने से पौंग डेम में आने वाली पानी की मात्रा एक तिहाई ही रह गई। इन दिनों पौंग डेम में पानी का इन फ्लो 10 हजार क्यूसेक के आसपास है जबकि इन दिनों 30 हजार क्यूसेक से ज्यादा इन फ्लो होना चाहिए। पौंग डेम का जलस्तर 1291 फीट ही है जबकि पिछले वर्ष इन फ्लो 20 हजार क्यूसेक था और तब जलस्तर 1296 फीट था। 2014 से 16 तक लगातार इन फ्लो 30 हजार क्यूसेक आसपास था रहा और इन वर्षों में जलस्तर 1300 फीट से कम नहीं हुआ।


भाखड़ा डैम में इस समय पानी का स्‍तर 1523 फुट है जो पिछले साल से 10 फुट कम है। भाखड़ा डैम में इस समय पहाड़ों से जो पानी आ रहा है वो पिछले साल के मुकाबले करीब 30 फीसदी कम है।


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Image : Infopatrika.com

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पश्चिमी विक्षोभ ने बढाई मुश्किल

पिछले करीब दो महीनों में पश्चिमी विक्षोभ के चलते हिमाचल में मौसम ठंडा ही रहा है। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों अधिकतम 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 20 से 22 डिग्री सेल्सियस तापमान रह रहा है। ग्‍लेशियर में बर्फ पिघलने के लिए ये अनुकूल नहीं है। तापमान में बढोतरी होने से तेजी से बर्फ पिघलती है। इससे भाखड़ा और पौंग बांध में ज्‍यादा पानी आता है। इसी पानी को आगे हरियाणा, पंजाब और राजस्‍थान को सप्‍लाई किया जाता है।

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