ऐसे करेंगे धान की नर्सरी तैयार तो मिलेगी स्‍वस्‍थ पौध

paddy nursery, धान की पौध

इन्‍फोपत्रिका खेती डेस्‍क


बासमती 1121, परमल और पीबी 1 जैसी धान की किस्‍मों की नर्सरी तैयार करने का समय आ गया है। कुछ समय बाद पूसा 1509 की पौध भी डाली जाएगी। धान की नर्सरी बहुत सावधानीपूर्वक तैयार करनी चाहिए। अगर आपने नर्सरी तैयार करते वक्‍त लापरवाही बरती तो इसका खामियाजा आपको कम उत्‍पादन और अधिक बीमारियों के रूप में उठाना पड़ेगा। इसलिए धान की नर्सरी लगाते वक्‍त पूरी जानकारी लें और अत्‍यंत सावधानी से प्रत्‍येक काम करें।


paddy nursery, धान की पौध
Image : Infopatrika.com

नर्सरी तैयार करने का अलग-अलग तरीके

सबसे पहले हम यह स्‍पष्‍ट कर दें कि धान की नर्सरी हर जगह अलग-अलग तरीके से तैयार की जाती है। जो तरीका पंजाब में अपनाया जाता है हो सकता है मध्‍यप्रदेश में उससे अलग कुछ किया जाता हो। इसी तरह हरियाणा, यूपी और राजस्‍थान में भी नर्सरी तैयार करने में कुछ भिन्‍नताएं होती है। लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं जो सभी नर्सरियों पर लागू होती है।

ऐसे करें बीज उपचार

5 किलोग्राम बीज को 8 किलोग्राम नमक घुले पानी में डालें। रोगग्रस्‍त हलके और टूटे हुए बीज पानी के ऊपर आ जाएंगे। इन्‍हें छलनी से निकाल दें। 5 किलोग्राम बीज के लिए 1 ग्राम स्‍ट्रेप्‍टासाइक्लिन और 8 ग्राम बॉवस्टिन उपचार के लिए काफी है। आप स्‍ट्रेप्‍टासाइक्लिन के साथ बॉवस्टिन के स्‍थान पर कैप्‍टान, मैंन्‍कोजेब, कार्बेडिज्‍म या थाइफोनेट मिथाइल भी मिला सकते हैं। इनकी मात्रा 2 ग्राम प्रति किलो बीज रखें। बीज को पानी में डालें। इस पानी में उपरोक्‍त दवाइयों के घोल को डालकर अच्‍छे से मिला दें। 18 घंटे तक बीज को इस पानी में रहने दें। फिर बीज को पानी से निकालकर बोरों पर बिछा दें। जब ये अंकुरित हो जाएं तो इन्‍हें नर्सरी में छिड़कें।


paddy nursery, धान की पौध
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कितना बीज एक एकड़ के लिए

धान का एक एकड़ लगाने के लिए पांच किलो पर्याप्‍त माना जाता है। हरियाणा और पंजाब में एक एकड़ के लिए दो मरला जगह में नर्सरी लगाई जाती है। एक मरला मतलब 16.6 फुट गुणा 16.6 फुट जगह। दो मरला में पांच किलो बीज डाला जाता है। कुछ किसान 2 किलो से 3 किलो प्रति मरला बीज भी डालते हैं। बीज की मात्रा जमीन के प्रकार, नर्सरी किस तरह लगाई जा रही है आदि बातों पर निर्भर करती है।

खेत की तैयारी

जिस जगह पर नर्सरी लगाई जानी है उसको पहले से ही तैयार कर लेना चाहिए। जमीन भी दो तरह से तैयार की जाती है। कुछ लोग खाली जमीन पर पानी लगा देते हैं। फिर जब उस पर खरपतवार आदि उग आते हैं तो उन्‍हें बिल्‍कुल हलकी निराई कर निकाल देते हैं। जमीन को नर्म नहीं होने दिया जाता। दूसरे तरीके में नर्सरी वाली जगह की जुताई की जाती है और उसे पाटा लगाकर भूरभूरा बना दिया जाता है।

खाद

एक कनाल में 20 मरले होते हैं। एक कनाल नर्सरी में 8 से 10 किलो डीएपी, 2 किलो जिंक और 4 किलो म्‍यूरेट ऑफ पोटाश डालें। अगर आप जुताई करके नर्सरी तैयार कर रहे हैं तो ये खाद जुताई से पहले डाल दें। अगर आप पक्‍की जमीन पर ही नर्सरी तैयार कर रहे हैं तो खाद जिस वक्‍त बीज छिड़कें उस समय बीज छिड़कने से पहले डालें।

कैसे डालें बीज

जुताई करके आपने जगह तैयार कर रखी है तो उस जगह को पहले पानी से भर दें। क्‍यारी भरने के बाद पानी बंद कर दें। जब पानी ठहर जाए तो धान के बीज को चार हिस्‍सों में बांट लें और क्‍यारी के साइड में चलते हुए चार बार बीज को छिड़क दें। बीज छिड़कने के बाद पानी पर बा‍रीक गोबर खाद का हल्‍का छींटा दे दें। अगर बीज अंकुरित हैं तो बिना गोबर खाद छिड़के भी बीज उग जाएंगे। शाम के वक्‍त रोज पानी लगाएं। पानी इतना ही लगाएं जो रात भर में सोख जाए।


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ये है दूसरा तरीका

अगर आपने नर्सरी पक्‍की जगह पर ही तैयार करनी है तो पहले उस पर सारी खादें डाल दें। फिर पानी से क्‍यारी को भर दें। अब कम से कम चार बार उसमें बीज छिड़कें। बीज छिड़कने के बाद पानी पर बारीक गोबर की खाद छिड़क दें। शाम के वक्‍त रोज पानी लगाएं। अगर हम बीजों को अंकुरित कराकर छिड़कते हैं तो गोबर की खाद डाले बिना भी बीज उग आएंगे। बस ध्‍यान ये रखना है कि बीज सूखने न पाएं।

इनका रखें खास ख्‍याल

बीज को पानी से बाहर निकालकर जब रखें तो उसे सूखने न दें। बोरी पर पानी छिड़कते रहें। बीजों का अंकुरण बहुत ज्‍यादा न होने दें। बीज का अंकुरण अगर लंबा हो जाए तो नर्सरी में छिड़कने पर धूप ज्‍यादा होने पर अंकुरण तुरंत सूख जाता है और बीज नष्‍ट हो जाता है। शाम के वक्‍त ही बीज छिड़कें। रात में ठंड होने से बीजों का जमाव अच्‍छा होता है। दिन में नर्सरी में पानी खड़ा न होने दें। पानी शाम को ही लगाएं। अगर दिन में पानी खड़ा रह जाए तो दोपहर में पानी और लगाना देना चाहिए ताकि पानी ठंडा रहे। नर्सरी की क्‍यारियों की लंबाई और चौड़ाई कम रखें।

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