खरबूजे के इन उन्‍नत बीजों और तकनीकों से किसान हो रहे हैं मालामाल

इन्‍फोपत्रिका खेती डेस्‍क
ग्रीष्‍मकालीन खरबूजे की बुआई का समय अब आ गया है। आमतौर पर नदियों के किनारे और बालू मिट्टी में होने वाले खरबूजे की खेती अब वैज्ञानिक ढंग (Hightech Muskmelon farming) से ऐसी जगहों पर भी की जा रही है, जहां पहले इसकी खेती नहीं होती थी। इस बात में कोई शक नहीं है कि खरबूजे की खेती से एक एकड़ में 1 लाख रुपए या इससे अधिक की बचत हो सकती है। बस शर्त ये है कि इसकी खेती आधुनिक तरीके से की जाए और मौसम अनुकूल रहे। साथ ही किसान कम से कम 60 रुपए तक खर्च करने की क्षमता रखता हो।

परंपरागत तरीके को बोलना होगा बाय

खरबूजा उत्‍पादन से अधिक मुनाफा लेने के लिए किसान को न केवल हाईब्रिड बीजों को लगाना होगा बल्कि इसकी खेती भी नए और उन्‍नत तरीके से करनी होगी। खेत की तैयारी, बीज रोपण, सिंचाई और खाद-स्‍प्रे देने के परंपरागत तरीकों को त्‍यागकर आधुनिक तरीके अपनाने होंगे।


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इन बीजों की बाजार में धूम

Hightech Muskmelon farming
बीज उत्‍पादन का आधार है। यह तथ्‍य खरबूजे की खेती पर भी लागू होता है। जो किसान खरबूजे की खेती करके प्रति एकड़ भरपूर मुनाफा कमा रहे हैं वो आधुनिक बीजों का उपयोग करते हैं। रेट और उत्‍पादन के लिहाज से जो इस समय सर्वोतम बीज है वो है ताईवानी कंपनी Known You Seed के बीज। इसके बाद नंबर आता है यूनाईटिड जेनेटिक्‍स (United Genetics) और सेमिनिस (Seminis) कंपनी के बीजों का।

आजकल ताईवान की कंपनी Known You Seed की किस्‍म बॉबी और मृदुला की धूम है। बेहतरीन उत्‍पादन और जबरदस्‍त मिठास के कारण ये दोनों वैरायटियां प्रगतिशील किसानों की पहली पसंद बनी हुई है। इनको पॉलीहाउस में भी लगाया जा सकता है और खुले खेत में भी। मार्केट में ये अच्‍छी कीमत पर हाथों हाथ बिकते हैं।

बुआई तकनीक

Hightech Muskmelon farming
अच्‍छा मुनाफा कमाने के लिए कुछ किसान खरबूजे की पहले नर्सरी तैयार करते हैं।ग्रीष्‍मकालीन खरबूजा फरवरी- मार्च में लगाया जाता है। लो टनल में तो इसकी बुआई दिसंबर में ही कर दी जाती है। 15 जनवरी के बाद ही वे ट्रे में बीजों को लगाते हैं। ट्रे में मिट्टी का प्रयोग नहीं करते बल्कि कोकोपीट (नारियल का बुरादा) और वर्मी कंपोस्‍ट के मिश्रण का उपयोग करते हैं। इससे जड़ में बीमारी नहीं लगती है और पानी भी बहुत कम देना पड़ता है। इस विधि में बीजों का जमाव 95 फीसदी होता है। किसान बीजों को सीधे खेत में भी रोप सकते हैं। लेकिन इससे बीजों का जमाव कम होगा तथा खेत में बेलों की संख्‍या कम रहने का खतरा रहता है जिससे उत्‍पादन प्रभावित होता है।


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बेड विधि से रोपाई

खरबूजे की उन्‍नत किस्‍मों को बेड विधि से लगाया जाता है। 10-10 फीट की दूरी पर नालियां बनाई जाती हैं। इनके बीच 5 फीट चौड़ा बेड बनाया जाता है। पौधे से पौधे की दूरी डेढ फीट रखी जाती है। बहुत से किसान ड्रिप सिंचाई विधि का प्रयोग सिंचाई के लिए करते हैं। जिनके पास ड्रिप सिंचाई की व्‍यवस्‍था नहीं है, वे नालियों से सिंचाई कर सकते हैं। बस ध्‍यान यह रखना है कि नालियों में इतना ही पानी भरा जाए कि केवल नमी ही जड़ तक पहुंचे, पानी नहीं।

मल्चिंग जरूरी

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जो बेड बनाया गया है, उस पर प्‍लास्टिक की शीट बिछाई जाती है। प्‍लास्टिक की शीट बिछाने को ही मल्चिंग कहा जाता है। म‍लचिंग के कई फायदे हैं। इससे जमीन में नमी ज्‍यादा रहती है, खरपतवार नहीं उगते और खरबूजे के फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते। इस कारण वो खराब नहीं होते। कुछ किसान बिना मलचिंग किए भी खरबूजा लगाते हैं। मलचिंग न करने से खरपतवार निकालने का खर्चा और मेहनत बढ जाती है और पानी भी ज्‍यादा देना पड़ता है।

बीज लेते वक्‍त बरतें सावधानी

खरबूजे के हाईब्रिड बीज बहुत महंगे हैं। Known You Seed कंपनी बॉबी बीज 1 लाख रुपए किलोग्राम से भी ऊपर के रेट पर मिलता है। मृदुला भी 75 हजार रुपए किलोग्राम है। एक एकड़ में 200 ग्राम से 250 ग्राम बीज की आवश्‍यकता होती है। बहुत ज्‍यादा महंगा होने के कारण मार्केट में इनके नाम से नकली बीज भी बेचे जा रहे हैं। इसलिए किसान जब भी बीज लें तो भरोसमंद जगह से ही लें।

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