ये तस्वीर बताती है, भारत में कहां-कहां जलाई जा रही हैं फसलें

fire in india NASA

इन्फोपत्रिका, नई दिल्ली.
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की पिछले 10 दिनों की तस्वीरों के मुताबिक इस समय भारत के कई हिस्सों में आग लगी हुई है. (फोटो में लाल निशान इसी बात का संकेत हैं.) दरअसल, ये निशान उन जगहों के हैं जहां पर फसल या फसलों के अवशेष जलाए जा रहे हैं. बता दें कि पिछले कुछ सालों में फसलों के अवशेष को जलाने का चलन काफी तेजी से बढ़ा है. लेकिन इस चलन के परिणाम कितने खतरनाक होंगे, इस बात पर कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा. खतरनाक परिणाम पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

देश के कई राज्यों में यही स्थिति

नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रकाशित एक ख़बर के मुताबिक, नासा के गॉडडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर स्थित रिसर्च साइंटिस्ट हिरेन जेठवा ने बताया कि मध्य भारत में आग के ऐसे निशान दिखने की वजह जंगलों की आग नहीं है, बल्कि फसलों के अवशेष जलाया जाना है.

fire in india NASA फसलों में आग
यह स्थिति उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत दक्षिण के भी कई राज्यों में दिख रही है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फसलों के अवशेष जलाने का चलन तेजी से इसलिए बढ़ा है क्योंकि किसान अब फसलों की कटाई मशीनों से करने लगे हैं और इसके चलते खेत में अवशेष रह जाते हैं. इन्हें खेत से हटाना आसान नहीं होता. यदि हटाया जाए तो काफी खर्च आता है. ऐसे में किसान उन्हें जलाना ही बेहतर समझते हैं.

पहले धान की पराली जलती थी, अब गेहूं का अवशेष भी

धान की पराली को तो काफी पहले से जलाया जा रहा है, क्योंकि यह पशुओं के लिए चारे के तौर पर अच्छा विकल्प नहीं माना जाता था. परंतु, अब गेहूं की फसल के अवशेष भी उसी तरीके से जलाए जा रहे हैं. वजह है मशीनीकरण और खेत में बचे अवशेष को हटाने की लागत में इजाफा.

खबर के अनुसार, फसलों के अवशेषों को जलाने के विषय पर अध्ययन करने वालीं इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस की शोधकर्ता रिधिमा गुप्ता ने कहा, ‘मेरा अनुमान है कि देश भर में मशीनों से फसलों की कटाई का प्रचलन बढ़ा है. मैंने अपने शोध के दौरान पाया कि फसलों के अवशेष जलाने का प्रचलन इसलिए तेजी से बढ़ा है क्योंकि मशीनों से फसल काटी जा रही है. किसान अवशेष जलाने को खुद खेतों से हटाने के मुकाबले सस्ता और आसान मानते हैं. इसके अलावा पशुओं को चारा खिलाने की जरूरत भी कम हो रही है, क्योंकि बहुत से किसानों की इसमें रुचि घट रही है. इसके चलते गेहूं की फसल के अवशेष जलाने का प्रचलन भी बढ़ा है.’

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