कपास उत्‍पादन पर मंडराने लगे खतरे के बादल

cotton export

इन्‍फोपत्रिका बिजनेस डेस्‍क

इस साल देश में कपास के बुआई क्षेत्र में बढोतरी हुई है लेकिन यह इस बात की गारंटी नहीं है कि इस वर्ष कपास उत्‍पादन में बढोतरी होगी। पिछले तीन सप्‍ताह के दौरान देश के प्रमुख कपास उत्‍पादन क्षेत्रों में काफी कम वर्षा हुई है। इससे उत्‍पादन प्रभावित हो सकता है। पिछले साल भी कम वर्षा से उत्‍पादन प्रभावित हुआ था।

cotton
Image : Google

भारतीय मौसम विभाग ने इस साल भी पिछले साल की तरह सामान्य मॉनसून का पूर्वानुमान जताया है। लेकिन दीर्घ अवधि औसत का सामान्य मॉनसून होने के बावजूद पिछले साल वर्षा का वितरण चिंताजनक रहा।

कपास की खेती वाले बड़े क्षेत्रों में कम वर्षा की सूचना से विशेषज्ञों ने पिछले साल की पुनरावृत्ति होने का डर जताना शुरू कर दिया है। इस साल अधिक रकबे के बावजूद किसानों को कम उपज का डर अपने आप में महत्त्वपूर्ण हो जाता है। किसानों ने इस सीजन की शुरुआत में रकबे में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने के बाद कपास बुआई की गति कम कर ली है।

जुलाई में कम बारिश की संभावना

मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने जून में चार प्रतिशत अधिक वर्षा की सूचना दी है। लेकिन इसने जुलाई में कम वर्षा रहने का पूर्वानुमान जताया है। स्काईमेट ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि आंतरिक महाराष्‍ट्र के अधिकांश भागों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में जुलाई में वर्षा हल्की रहेगी। गुजरात, राजस्थान और हरियाणा के पश्चिमी भाग तथा पश्चिम मध्य प्रदेश में बहुत ही कम बारिश होगी।

जुलाई और अगस्त के दौरान होने वाली वर्षा भारतीय कृषि के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। इस कारण इस खरीफ सीजन की कृषि पैदावार पर कोई पुख्ता आंकलन करने से पहले हमें अगस्त के आखिर तक इंतजार करना पड़ेगा। कृषि मंत्रालय द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि कपास के तहत आने वाला बुआई क्षेत्र 7 जुलाई तक मामूली रूप से बढ़कर 72 लाख हेक्टर हो गया है, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 68 लाख हेक्टर था।

बारिश की सख्‍त आवश्‍यकता

हरियाणा के सिरसा जिले के कालावांली के किसान अमरजीत सिंह का कहना है कि पिछले पंद्रह दिन से बिल्‍कुल भी बारिश नहीं हुई है। उमस और गर्मी ज्‍यादा है। इससे कपास में बीमारियां ज्‍यादा आ रही है। पंजाब के मलोट में खेती दस एकड़ में अमेरिकन कपास बो चुके किसान निर्मल सिंह का कहना है कि जुलाई में सप्‍ताह में एक बार बारिश होना कपास के लिए जरूरी है। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है।

हरियाणा के फतेहाबाद, सिरसा, भिवानी पंजाब के बठिंडा, फिरोजपुर, मुक्‍तसर और फरीदकोट तथा राजस्‍थान के गंगानगर और हनुमानगढ जिलों में जुलाई में काफी कम बारिश हुई है। यही इलाका उत्‍तर भारत की कॉटन बेल्‍ट कहलाता है। अगर आने वाले कुछ दिनों में गुजरात, राजस्थान और हरियाणा के पश्चिमी भाग तथा पश्चिम मध्य प्रदेश में बहुत कम बारिश हुई तो कपास उत्‍पादन में भारी गिरावट होना निश्चित है।

loading...