बासमती चावल और कपास की कीमतों में गिरावट की संभावना कम

Basmati rice and cotton rate

इन्‍फोपत्रिका, खेती डेस्‍क
बासमती धान को लेकर इस सीजन की शुरूआत से ही ये कहा जा रहा था कि इस बार इसके रेट पिछली बार से कम होंगे। बाजार को तोड़ने वाले लोगों की अफवाहें शुरू से ही गलत साबित होती आई है। अब एक बार फिर बासमती निर्यात को लेकर गलत खबरें फैलाई जा रही है। इसका असर इस सप्‍ताह कीमतों पर देखने को मिला और बासमती 1121 धान के भाव कुछ टूट गए। लेकिन शुक्रवार से फिर भाव उठ गए। हकीकत ये है कि बासमती की मांग अच्‍छी बनी हुई है। ईरान बासमती आयात को तैयार बैठा है। यही कारण है कि बाजार थोड़ा टूटते ही वापस संभल जाता है।


Basmati rice and cotton rate
Image : infopatrika.com

चावल के बदले तेल

बासमती चावल बाजार पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि ईरान को चावल निर्यात को लेकर पेंच पैमेंट पर फंसा हुआ था। यह पेंच लगभग निकल गया है। अब ईरान भारत से चावल आदि अनाज के बदले कच्‍चा तेल देगा। दोनों देशों के बीच इस पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इससे बाजार को सहारा मिलेगा। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में बासमती धान और चावल की कीमतों में गिरावट नहीं आएगी।


जानकारों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में बासमती चावल का कुल निर्यात 40 लाख टन के करीब ही होने का अनुमान है जबकि पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान 20.82 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हो चुका है अत: अगले छह महीनों यानि मार्च तक और 20 लाख टन के करीब निर्यात होगा।

घटने लगी आवक

उत्पादक मंडियों में बासमती धान की दैनिक आवक घटने लगी हैं, तथा माना जा रहा है कि पहले साल जहां दिसंबर के आखिर तक आवक बनी रही थी, वही चालू सीजन में नवंबर के अंत या फिर दिसंबर के पहले सप्ताह तक आवक काफी कम हो जायेगी, इसलिए भविष्य तेजी का ही माना जा रहा है।


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कपास में तेजी का अनुमान

कपास के भाव उत्पादक राज्यों की मंडियों में रुके हुए हैं, उत्पादक राज्यों में कपास की दैनिक आवक बढ़ी है, जिस कारण इसके भाव में हल्की नरमी आ सकती है लेकिन भविष्य तेजी का ही है। कपास की पैदावार चालू सीजन में कम रहेगी, जबकि आगे निर्यात मांग बढ़ने की संभाववना है। कपास खल और बिनौला में गिरावट आई है, व्यापारियों के अनुसार इनके मौजूदा भाव में और भी 75 से 100 रुपये की गिरावट आ सकती है, अत: मंदा आने पर खरीद ही करनी चाहिए क्योंकि भविष्य तेजी का ही है।

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