बासमती की इन नई किस्‍मों में कम लगेगी बीमारी, उपज होगी ज्‍यादा

basmati dhan ke taza bhav

इन्‍फोपत्रिका खेती डेस्‍क


बासमती धान में झुलसा (ब्‍लास्‍ट) और बैक्टिरियल ब्‍लाइट दो ऐसे रोग हैं जो फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। अब इन दोनों रोगों से छुटकारा दिलाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने दो नई किस्‍में जारी की हैं। ये किस्‍में हैं पूसा बासमती 1637 और पूसा बासमती 1728। ये दोनों किस्‍में ही बीमारियों से लड़ने में ज्‍यादा सक्षम हैं।


Basmati 1637 & 1728
Image : Google

पूसा बासमती 1637

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की किस्‍म पूसा 1637 बासमती 1 किस्‍म का सुधरा रूप है। इस किस्‍म की खास बात है कि इसमें झुलसा रोग नहीं लगेगा। झुलसा रोग धान का एक प्रमुख रोग है। यह रोग बड़ी तेजी से फैलता है और इसके काबू करना बहुत कठिन होता है। यह पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसे रोकने के लिए महंगे कीटनाशकों का स्‍प्रे करना पड़ता है। पूसा 1637 इस बीमारी से लड़ने में सक्षम है। यह नई वैरायटी एक एकड़ में 25 क्विंटल तक पैदावार देगी।

पूसा बासमती 1728

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने बासमती धान की जो दूसरी किस्‍म तैयार की है वो है पूसा 1728। यह किस्‍म बासमती 1401 का सुधरा हुआ रूप है। पूसा 1728 बैक्टिरियल ब्‍लाइट रोग के प्रति सहनशील है। इसमें यह रोग नहीं लगेगा। बैक्टिरियल ब्‍लाइट भी एक खतरनाक रोग है। हर साल यह किसानों को भारी नुकसान करता है। पूसा 1728 क्‍योंकि इस रोग के प्रति सहनशील है तो इस किस्‍म में यह रोग नहीं आएगा। इसकी पैदावार भी प्रति एकड़ 25 क्विंटल तक होगी।


ये भी पढ़ें- बैंगन की ये नई किस्‍म देगी भरपूर पैदावार

हो सकेगा यूरोपीय देशों में निर्यात

यूरोपिय यूनियन ने भारतीय बासमती चावल में कीटनाशकों की निर्धारित मात्रा को काफी कम कर दिया है। इस वजह से भारतीय बासमती चावल का यूरोपीय देशों को निर्यात लगभग बंद ही हो गया है। पूसा 1637 और पूसा 1728 में रोग कम आएंगे और इनमें कीटनाशकों का छिड़काव कम करना होगा। खासकर ट्राईसाइक्‍लोजोल का। इससे इनका निर्यात आसानी से हो सकेगा।


ये भी पढ़ें- स्‍वराज ने पेश किया 60 एचपी का नया ट्रैक्‍टर

बीज लेते वक्‍त रखें सावधानी

किसानों को इन नई वैरायटियों का बीज लेते वक्‍त सावधानी बरतनी चाहिए। जहां तक हो सके बीज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के क्षेत्रिय स्‍टेशनों से ही लें। या फिर ऐसे किसानों या समूह से बीज लें जो विश्‍वसनीय हों। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी कोई नई किस्‍म बाजार में आती है तो कुछ स्‍वार्थी लोग किसानों को नकली बीज महंगे भाव पर बेच देते हैं।

Comments are closed.

loading...